आनन्द[१] ने कातना शुरू किया और तारामती भी बहुत सुन्दर कातती है। यह तो मेरा सुझाव है। उस पर उतना अमल करना जितना कर सको।
आनन्दानन्द आज भी नहीं आया, यह बहुत आश्चर्य की बात है।
बापू के आशीर्वाद
मूल गुजराती से : प्यारेलाल पेपर्स। नेहरू–स्मारक संग्रहालय तथा पुस्तकालय; सौजन्य : बेलादेवी नैयर और डॉ॰ सुशीला नैयर
२०३. पत्र : मथुरादास त्रिकमजी को
[शुक्रवार, १० सितम्बर, १९१९][२]
तुम्हारे और महादेव के पत्र के कारण मैंने वहां आने का विचार छोड़ दिया है। यह दुःखदायी है कि भाई पढियार[३] के विषय में सभा भी रविवार को है। तुम वहां हाजिर रहना। भाई मावजी गोविन्दजी से माफी मांग लेना, लेकिन सभा होने देना। मैं तो यह चाहता हूं कि सत्याग्रह से सम्बन्धित सभा भी होनी चाहिए। मेरे लिए तो इतना ही काफी है कि सभा हो और तुम उसमें शामिल हो।
मेरे स्वास्थ्य के विषय में तुम्हें चिन्ता नहीं करनी चाहिए। मैं अपने स्वास्थ्य का जितना जरूरी हो उतना ध्यान तो रखता हूं और अगर अधिक रख सकता तो वह भी रखता। मैंने अभी कुछ फेर–बदल किया है। जितना मुझसे हो सकता है मैं उतना ही काम करता हूं। तुमने जो कुछ लिखा है वह ठीक लिखा है। ऐसा तुम ही लिख सकते हो।
महादेव भाई वहां नहीं होगा, यह सोचकर यह पत्र मैंने तुम दोनों को लिखा है।
मेरे स्वास्थ्य की खातिर इतना ही करो कि भाई उमर से मिलो और उनसे कहो कि 'यंग इंडिया' को अहमदाबाद से प्रकाशित करने की अनुमति दे दें।[४] यदि यह सम्भव न हो तो मैं महादेव को यहीं रोक लूंगा। सामग्री वहां भेज सकते हैं, और भाई नन्दलाल और भाई यादवादकर प्रूफ वहां भेज सकते हैं। मुझे वहां सामग्री भेजना बहुत भारी लगता है।