सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 91.pdf/२५३

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ जाँच लिया गया है।

 

२२७. पत्र : मथुरादास त्रिकमजी को

लाहौर
मागसर सुदी १४ [६ दिसम्बर, १९१९][]

चि॰ मथुरादास,

'हिन्दुस्तान' के भाई रतनलाल का स्वर्गवास हो गया है। तुम जाकर उनके परिवार से मिलना और मुझे उनकी स्थिति के बारे में बताना। अब 'हिन्दुस्तान' का काम कौन संभाल रहा हैं, यह भी मुझे बताना। भाई मावजी गोविन्दजी से मिलना और पढ़ियार स्मारक का क्या हुआ, यह भी बताना।

बापू के आशीर्वाद

चि॰ मथुरादास त्रिकमदास
२४७, बाजार गेट स्ट्रीट
फोर्ट, बम्बई

मूल गुजराती से : प्यारेलाल पेपर्स। नेहरू–स्मारक संग्रहालय तथा पुस्तकालय; सौजन्य : बेलादेवी नैयर और डॉ॰ सुशीला नैयर

२२८. पत्र : अनसूयाबहिन साराभाई को

लाहौर
सोमवार [१५ दिसम्बर, १९१९][]

पूज्य बहिन,

पण्डित जगत नारायण[] ने मुझसे पूछा है कि वे कहां ठहरें। मैंने आपके भाई के बंगले पर ठहरने का सुझाव दिया है। आप भाई से पूछ लें कि यदि उनका जगत नारायण को आमन्त्रित करने का विचार है। वे उन्हें तार दे दें। पण्डित जगत नारायण २२ तारीख तक लखनऊ पहुंचेंगे। यह पत्र आपको १७ तारीख को मिलेगा। यदि यहां तार भेजेंगी तो चलेगा। यदि आप २० तारीख के

  1. वर्ष और मास डाक की मोहर पर से लिये गये हैं १९१९ में मागसर सुदी १४, ६ दिसम्बर को थी।
  2. तिथि का निर्धारण पत्र के १७ तारीख को अपने गन्तव्य पहुंचने के उल्लेख और तिथि–पंक्ति में लिखे लाहौर तथा सोमवार के आधार पर किया गया है। १५ दिसम्बर, १९१९ को सोमवार तथा और गांधीजी उस समय लाहौर में थे। इस तिथि की पुष्टि उनके अगले महीने पहली तारीख के आसपास अहमदाबाद पहुंचने के उल्लेख से भी हो जाती है। गांधीजी लाहौर से अहमदाबाद ४ जनवरी, १९२० को पहुंचे थे।
  3. संयुक्त प्रान्त की विधान परिषद् के सदस्य तथा हंटर कमेटी के तीन सदस्यों में से एक सदस्य।
२१३