२३०. कांग्रेस के लिए प्रस्ताव
अमृतसर
[३० दिसम्बर, १९१९][१]
यह कांग्रेस उन लोगों के सम्बन्धियों के प्रति जो अप्रैल के दंगों के समय मृत तथा घायल हुए थे, चाहें वे अंग्रेज थे अथवा भारतीय, सम्मानपूर्वक अपनी सहानुभूति एवं संवेदना प्रकट करती है।
यह कांग्रेस इस बात का संकल्प करती है कि अमृतसर स्थित जलियांवाला बाग नामक स्थान का राष्ट्र के निमित्त अधिग्रहण किया जाये और माननीय पण्डित मदनमोहन मालवीय तथा माननीय पण्डित मोतीलाल नेहरू के नाम से यह स्थान पंजीकृत किया जाये। इस स्थान का प्रयोग गत १३ अप्रैल को जनरल डायर द्वारा किये गये सामूहिक हत्याकाण्ड में मृत अथवा घायल लोगों की स्मृति चिरस्थायी रखने के लिए एक स्मारक के रूप में किया जाये।
कांग्रेस के इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए निम्नलिखित लोगों की एक समिति नियुक्त की जाती है : मदनमोहन मालवीय, मोतीलाल नेहरू, चि॰ रं॰ दास और श्रद्धानन्द। इन लोगों को इस बात का अधिकार प्रदान किया जाता है कि वे मृत लोगों की स्मृति अमर रखने के लिए एक श्रेष्ठ योजना तैयार करें और उसके लिए उचित न्यास स्थापित करें तथा वे स्मारक बनाने और न्यास चलाने के लिए चन्दा एकत्र करें।
इस कांग्रेस का मत है कि जबतक रौलट अधिनियम के नाम से मशूहर कानून, जिसे देश में एकमत से विरोध होने के बावजूद पास किया गया है [रद्द नहीं हो जाता], तब तक देश में सच्ची शान्ति स्थापित होना असम्भव है। अतः यह कांग्रेस महामान्य भारतमन्त्री से सादर अनुरोध करती है कि वे महामहिम सम्राट को यह अधिनियम बीटो द्वारा रद्द करने की सलाह दें।
यह कांग्रेस दण्ड–विभुक्ति विधेयक असमय पारित करने की भारत सरकार की कार्यवाही का सख्त विरोध करती है, क्योंकि जिन कार्यों के सम्बन्ध में दण्ड-विभुक्ति प्रदान की गई थी, उनके विषय में सरकारी जांच की जानी थी और समाचारपत्रों, अनेक सार्वजनिक संस्थाओं और शाही विधान परिषद के अधिकांश गैर–सरकारी सदस्यों ने इस विधेयक का प्रबल विरोध किया था।
अंग्रेजी की नकल से : अ॰ भा॰ कांग्रेस कमेटी फाइल। सौजन्य : नेहरू–स्मारक संग्रहालय तथा पुस्तकालय
- ↑ गांधीजी ने ३० दिसम्बर, १९१९ को अमृतसर के कांग्रेस अधिवेशन में यह प्रस्ताव पेश किया था।