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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 91.pdf/२८०

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सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय


क्या आप जानते हैं कि 'नवजीवन' और 'यंग इंडिया' के लिए कागज लगभग समाप्त हो गया है? इस सम्बन्ध में आप जो कुछ कर सकते हों कीजिए। आपके आनन्दानन्द से चाहे कुछ भी सम्बन्ध न रहें हों, लेकिन यदि कहीं से कागज मिल सकता हो तो मैं चाहता हूं कि आप उन्हें पत्र लिखें।

क्या आपको मालूम है कि लालचन्द[] को निकाल कर वकील को रखा है? लेखक के रूप में लालचन्द का कार्य सन्तोषजनक नहीं था, लेकिन उसकी मेहनत और ईमानदारी प्रशंसनीय थी।

मैं पंजाब के गवर्नर से मिला था, उनसे बहुत-सी बातें हुई। हम क्या चाहते हैं, वे यह समझना चाहते थे।

क्या आप कांग्रेस की तैयारी में कोई हिस्सा ले रहे हैं? इस अवसर पर हमें अपनी प्रबन्ध–क्षमता, विनयशीलता, एकता अनुशासन आदि का पूरी तरह प्रदर्शन करने की जरूरत हैं। मैं चाहता हूं कि आप बिना किसी रागद्वैष के इस कार्य में जुट जायें। मैं आपकी कठिनाई समझता हूं। जितना हो सके उतना ही करें।

मांजी को प्रणाम,

मोहनदास के वन्देमातरम्

मूल गुजराती (एस॰ एन॰ ३२७०२) से

२६७. भाषण : साधक आश्रम, अंधेरी में

बम्बई
[१५ मार्च, १९२१][]

आश्रमवासियों को मैं अपनी रिजर्व फोर्स मानता हूं। स्वतन्त्रता लेने और अंग्रेजों से लड़ने के लिए मैं उनका उपयोग नहीं करना चाहता। स्वतन्त्रता तो मैं जनता के बल पर ले लूंगा। आश्रमवासियों की जरूरत तो स्वतन्त्रता के बाद पड़ेगी। स्वतन्त्रता लेना मुझे इतना कठिन नहीं दिखाई दिया जितना स्वराज्य को चलाने का काम होगा और उसके लिये अत्यधिक मंजे–तपे और साधन–सम्पन्न लोगों की जरूरत होगी। मैं चाहता हूं कि आश्रमवासी उसी साधना में लगें और इसलिये मैं इस आश्रम का नाम साधक आश्रम रखना अधिक पसन्द करता हूं और यहां के संचालकों और आचार्य श्री देशपांडे सबसे विचार-विनिमय करने के बाद मैंने इस आश्रम का नाम साधक आश्रम रखने का निश्चय किया है। यहां के आश्रमवासियों को मैं इस चलने वाले राजनैतिक कार्यक्रमों से दूर रखना चाहता हूं। उन्हें तो एक लम्बी साधना तथा रचनात्मक कार्यक्रमों में से गुजरना होगा।

गांधीजी और राजस्थान, पृ॰ २८९–९०

  1. लालचन्द अडवानी, जिन्हें 'यंग इंडिया' के सहायक सम्पदाक के कार्यभार से मुक्त कर दिया गया था। गांधीजी द्वारा किये गये इस सम्पादकीय परिवर्तन के लिए देखिए "टिप्पणियां", २०-४-१९२१ और "पत्र लालचन्द को" २९-१-१९२१ और "पत्र : सी॰ एफ॰ एण्ड्रयूज को", २-३-१९२१ भी।
  2. गांधीजी इसी तारीख को साधक आश्रम गये थे।
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