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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 91.pdf/२८१

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२६८. पत्र : शंकरलाल बैंकर को

नागपुर
[१९ मार्च, १९२१][]

भाईश्री शंकरलाल,

जबसे मांजी को देखा है उनका चेहरा मेरी आंखों के सामने रहता है। मैं चाहता हूं कि आपको कंठी पहनाने की उनकी इच्छा को आप पूरा मान दें। जब आपको उसे पहनने में कोई पाप दिखाई दे तब आप भले ही उसे उतार दें। माता द्वारा पहनाई गई कंठी पुत्र के लिए अमरमाला बन जाती है। अगर आपने उसे अब तक नहीं पहना है तो मैं चाहता हूं कि उसे पहनें और मुझे तार दें।

मेरी यात्रा का कार्यक्रम इस प्रकार होगा :

२०–२१ जबलपुर

२२ गोंदिया—१२ बजे तक

२२–२३ नागपुर मेल

२४ सवेरे कटक, मार्फत उत्कल सोसायटी

२९ तक उड़ीसा में घूमूंगा

३१ को बैजवाड़ा पहुंचेंगे, ऐसा अनुमान है।

मोहनदास के वन्देमातरम्

मूल गुजराती (एस॰ एन॰ ३२७४०) से

२६९. पत्र : कनैयालाल वकील को

बहरामपुर
मंगलवार, [२९ मार्च, १९२१][]

भाईश्री कनैयालाल,

आप बीमार होकर गये इस बात का मुझे हमेशा दुःख रहेगा। मैंने तो आपसे बहुत काम लेने की उम्मीद रखी थी। अभी आपको छोडूंगा नहीं। आप जल्दी ठीक हो जाइए। यदि आपरेशन करवाना जरूरी है तो मेरी सलाह है कि आप निडर होकर करवा लें। डॉ. दलाल से अपने स्वास्थ्य की जांच करवा लें तो अच्छा है। जब आप स्वस्थ हो जायें तब मुझे दो लाइनें लिख दीजिए।

मोहनदास के वन्देमातरम्

बॉम्बे क्रॉनिकल, २६-१२-१९३७ में प्रकाशित गुजराती की प्रतिकृति से

  1. वर्ष का निर्धारण गांधीजी के यात्रा कार्यक्रम के आधार पर किया गया है।
  2. तिथि का निर्धारण बहरामपुर में गांधीजी की उपस्थिति से किया गया है। मंगलवार भी इसी तिथि को था।
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