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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 91.pdf/२८३

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पत्र : शंकरलाल बैंकर को

[के लिए] कुछ परिवर्तन करना पड़ा तो करूंगा।

मोहनदास के वन्देमातरम्

[पुनश्च:]

झण्डा बहुत सादा होना चाहिए।[] इसलिए चरखे पर बहुत ध्यान देने की आवश्यकता नहीं हैं। चरखा उसी रंग का रहेगा। वह पीले रंग का होगा तो भी चलेगा ऐसा लगता है—या फिर गेरुए रंग का हो। मैंने एक नमूना चन्दूलाल को दिया है।

[पुनः पुनश्चः]

बम्बई से कम–से–कम ३० लाख का चन्दा होना चाहिए, ऐसा मैं मानता हूं।

मूल गुजराती (एस॰ एन॰ ३२७१६) से

२७२. पत्र : शंकरलाल बैंकर को

२४ अप्रैल, १९२१

भाईश्री शंकरलाल,

प्रयाग से कुमारी मसूरकर का पत्र आ गया है। अब यदि हमें कन्याशाला आरम्भ करनी है तो हम उसे बुला सकते हैं। वह कहती है कि उसे वेतन की भी जरूरत नहीं है, परन्तु हमें तो उसे वेतन देना ही चाहिए। उसके साथ एक और महिला भी आने के लिए राजी है। प्रोफेसर टहलरमानी आ गये हैं। अब जिस किसी के साथ सलाह करनी हो कर लीजिए।

मोहनदास के वन्देमातरम्

मूल गुजराती (एस॰ एन॰ ३२७१८) से

  1. देखिए "राष्ट्रीय झंडा", १३-४-१९२१।
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