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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 91.pdf/२८७

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२७८ पत्र : मथुरादास त्रिकमजी को

लखनऊ जाते हुए
रविवार, ७ अगस्त, १९२१

चि॰ मथुरादास,

ये सवाल मेरे पास ही पड़े रह गये। मैंने आज ही उन्हें देखा है और उनमें सुधार भी किया है। उनका जो भी उपयोग करना चाहो कर लेना। तुम्हारी तबीयत ठीक हो गई होगी। मैंने आने का प्रयत्न तो बहुत किया, पर कैसे आ सकता हूं? मुझे पत्र लिखना। मेरी यात्रा का विवरण निम्नलिखित है।

८ लखनऊ

९ कानपुर

१० प्रयागजी

११–१५ पटना पता : राजेन्द्रप्रसाद वकील

१६–२० गोहाटी—असम कांग्रेस कमेटी

मुझे दुर्गा की तबीयत का समाचार भी लिखना।

बापू के आशीर्वाद

मूल गुजराती से : प्यारेलाल पेपर्स। नेहरू–स्मारक संग्रहालय तथा पुस्तकालय। सौजन्य : बेलादेवी नैयर और डॉ॰ सुशीला नैयर

२७९. पत्र : बैनेट को

सोमवार [८ अगस्त, १९२१][]

प्रिय श्री बैनेट,

लखनऊ में वेश्यावृत्ति जैसी बुराई की ओर मेरा ध्यान आकर्षित करने के लिए आपको धन्यवाद। मुझे इसकी जानकारी है और इस बारे में मैं बात भी कर चुका हूं। मैं जाने से पहले फिर से चर्चा करूंगा। मैं इस बारे में 'यंग इंडिया' में भी लिखूंगा। इस विषय में मदद करने की आपकी पेशकश के लिए शुक्रिया।

हृदय से आपका
मो॰ क॰ गांधी

अंग्रेजी की फोटो–नकल (जी॰ एन॰ ११६६८) से

  1. बैनेट द्वारा गांधीजी का ध्यान "लखनऊ में वेश्यावृत्ति जैसी बुराई की ओर" दिलवाने का उल्लेख होने से, गांधीजी ने १८-८-१९२१ के 'यंग इंडिया' में बेनेट का पत्र उद्धृत किया था। इसकी पुष्टि इन शब्दों से भी होती है, "मैं जाने से पहले फिर से चर्चा करूंगा" गांधीजी सोमवार ८ अगस्त, १९२१ को लखनऊ में ही थे।
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