२८४. पत्र : अनसूयाबहिन साराभाई को
जोरहाट
२४ अगस्त, १९२१
आपको पत्र लिखने की इच्छा तो बहुत होती है पर समय कहां से निकालूं?
मैंने आपको एक पत्रिका भेजी है। लेकिन स्वदेशी के बारे में नहीं भेज सका। अब वह कुछ काम की नहीं है, ऐसा मानकर नहीं भेज रहा हूं।
वहां का काम कैसा चल रहा है लिखना। क्या कभी आश्रम जाती हो? वैसे जाना चाहिए। मुझे सारे समाचार देना। हमारे सभी प्रयत्न स्वदेशी की सम्पूर्णता पर निर्भर हैं।
मजदूर क्या कर रहे हैं? मिलों की क्या स्थिति है?
अमूभाई से पूछकर मुझे जरूर लिखना कि 'साइजिंग' में क्या–क्या मिलाते हैं। 'साइजिंग' में चर्बी होती है, मैं गलत तो नहीं? चर्बी का उपयोग और कहां–कहां करते हैं, वह भी मुझे लिखना।
बापू के आशीर्वाद
मेरा प्रवास कार्यक्रम :
२५–३० सिलचर
३१–१ चटगांव
२–३ बारीसाल
मूल गुजराती (एस॰ एन॰ ३२८१६) से
२८५. पत्र : अनसूयाबहिन साराभाई को
रास्ते में
१७ सितम्बर, १९२१
आपका पत्र मिला। मजदूरों के विषय में मंगलदास सेठ को जो तार किया है, उसकी नकल आपको भेजी है। यह दूसरा तार है। अब इससे अधिक तो कुछ करना नहीं रहता। २ अक्तूबर को बम्बई पहुंचने की आशा है। उस दिन सोमवार है।
बापूभाई की तबीयत के समाचार दुःखद है। उसके बारे में आज तार भेज रहा हूं। भाई