आप दिसम्बर के बारे में मेरे वक्तव्य की मनोभावना को समझ नहीं पाये।[१] आज भी मेरी यही धारणा है।
अब सविनय अवज्ञा स्थगित किये जाने का कोई खतरा नहीं है।
यदि आप जलगांव के बुनकरों में जागृति लाने में सफल हो जाते हैं, तो मुझे प्रसन्नता होगी।
हृदय से आपका
मो॰ क॰ गांधी
अंग्रेजी की फोटो नकल (जी॰ एन॰ ६६४४) से। (सी॰ डब्ल्यू॰ ३२९८) से भी : सौजन्य : डॉ॰ एम॰ एस॰ केलकर
२९२. पुर्जा : मथुरादास त्रिकमजी को
सोमवार (प्रातः),२१ नवम्बर, १९२१
इसकी नकल करवाकर और गुजराती में अनुवाद करके मुझे दिखाना। अनुवाद करने की शक्ति मुझमें नहीं है। मुझे और बहुत लिखना है।
मूल गुजराती से : प्यारेलाल पेपर्स। नेहरू-स्मारक संग्रहालय तथा पुस्तकालय: सौजन्य : बेलादेवी नैयर और डॉ॰ सुशीला नैयर
२९३. पत्र : शंकरलाल बैंकर को
आश्रम
७ दिसम्बर, १९२१
आपके दोनों पत्र मिले। आपने वहां जो भी कदम उठाये हैं वे ठीक लगते हैं। कल मैंने आपको पत्र लिखा है। बिना दुःखी हुए तटस्थ भाव से सब कदम उठाना अच्छा है। श्रीमती नायडू से भी सभी विषयों पर बात कर लेना ठीक होगा।
आपके दूसरे पत्र से लगता है कि आप मेरी बात समझे नहीं। 'नवजीवन' में काफी पैसे जमा हो गये हैं। मेरे विचार से उन्हें बेकार पड़े रहने के बजाय, आपने जो पैसे उसमें जमा करवाये थे उन्हें निकाल कर किसी दूसरे काम के लिए उपयोग करें तो बेहतर होगा। मैंने पैसे निकालने के
- ↑ 'दिसम्बर के बारे में वक्तव्य' से तात्पर्य सम्भवतः २९-१०-१९२१ के 'भाषण: स्वदेशी पर' के दौरान किये गये उल्लेख से है।