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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 91.pdf/३०१

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३०१. पत्र : शंकरलाल बैंकर को

साबरमती
१८ दिसम्बर, १९२१

भाईश्री शंकरलाल,

मैं कल करमसद गया था इसलिए स्वर्गीय धोंडी के बारे में नहीं लिख सका। आज उसके कागजात पढ़े। ऐसे मामलों में तो प्रान्तीय कमेटी जांच करके पैसे दे दे, यही ठीक लगता है। आज जमनादास और कुंजरू आ गये है। उनके समाचार भाई कानजी देंगे।

मोहनदास के वन्देमातरम्

मूल गुजराती (एस॰ एन॰ ३२७२०) से

३०२. पत्र : शंकरलाल बैंकर को

[१९ दिसम्बर, १९२१][]

भाईश्री शंकरलाल,

चैक मिला। बाकी का तुरन्त भेज देंगे, ऐसा माने लेता हूं। यदि आप नहीं आ सकते तो प्रस्ताव के मसौदे पर अपनी समीक्षा भेज दें।

मोहनदास के वन्देमातरम्

मूल गुजराती (जी॰ एन॰ ११५४०) से

३०३. पत्र : शंकरलाल बैंकर को

साबरमती
२० दिसम्बर, १९२१

भाईश्री शंकरलाल,

शिष्टाचार के नाते ही लिबरलों को निमन्त्रण भेजे गये हैं। वे प्रेक्षक के रूप में सब कुछ देख सकते हैं। हमारे संविधान के अनुसार उन्हें किसी अन्य तरीके से शामिल होने का अधिकार नहीं है। यह अलग बात है कि उनमें से कोई व्यक्तिगत रूप से परिचर्चा में भाग लें।

अब तक आपको टिकटें तो मिल गई होंगी। इन टिकटों की स्वीकृति के लिए स्वागत समिति के अधिकारियों को विशेषरूप से कहना पड़ा। स्वागत समिति ने दो महीने पहले से मुफ्त

  1. डाक की मोहर पर से
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