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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 91.pdf/३१२

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३१५. तार : मथुरादास त्रिकमजी को

बारडोली
४ फरवरी, १९२२

मथुरादास
९३ बाजार गेट स्ट्रीट
बम्बई

तुमने अत्यन्त बुद्धिमत्तापूर्ण कार्य किया।

गांधी

मूल अंग्रेजी से : प्यारेलाल पेपर्स। नेहरू स्मारक संग्रहालय तथा पुस्तकालय; सौजन्य : बेलादेवी नैयर और डॉ॰ सुशीला नैयर

३१६. पत्र : शंकरलाल बैंकर को

सोमवार [१३ फरवरी, १९२२][]

भाई शंकरलाल,

मैंने नारदेवा में शुक्रवार की शाम तक के लिए उपवास[] रखा है। आप घबराना नहीं । उपवास तो रखना ही नहीं। अपने काम में व्यस्त हो जाइए। मुझे कल आपसे बात करनी थी लेकिन आप मिले ही नहीं। उस चैक को निबटा देना। कोई कुछ भी कहे, हमें तो अपना दायित्व निभाना है।

मोहनदास के वन्देमातरम्

भाई शंकरलाल घेलाभाई बैंकर
सेवाश्रम
मिर्जापुर
अहमदाबाद

मूल गुजराती (जी॰ एन॰ ११५४१) से

  1. यह उपवास चौरी–चौरा की हिंसक घटनाओं के प्रायश्चित स्वरूप शुरू किया गया था; देखिए "चौरी–चौरा का हत्याकांड", १६-२-१९२२।
  2. उपवास के उल्लेख से, जिसे गांधीजी ने रविवार, १२ फरवरी, १९२२ को आरम्भ किया था।
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