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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 91.pdf/३१८

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सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय


खटकता है। इन सब विचारों को यदि तुम्हारे ऊपर लागू किया जाये तो मैं केवल यही कहूंगा कि तुम जो कुछ करना चाहते हो उसे धैर्यपूर्वक करो, उसमें सफलता प्राप्त करने का प्रयत्न करो और परिणाम के प्रति तटस्थ रहो।

यदि तुम चाहो तो मैं तुम्हारे लिए मकान का प्रबन्ध करने के लिए तैयार हूं। तुम्हारे सुख- शान्ति के लिए मैं सब-कुछ करने के लिए तैयार हूं। मैंने पहले भी स्वीकार किया है और अब भी करता हूं कि यदि मैंने तुम्हें अधिक शिक्षा देने का प्रयत्न किया होता तो आज तुम इस अव्यवस्थित दशा में न होते। जो हो गया उसे मिटा तो कौन सकता है ? चलो हमसे जो भूल हो गई है उस पर दुःख न करके हम फिर से शुरूआत करें।

यह याद रखना कि यदि तुम्हें वहां शान्ति नहीं मिलती तो तुम्हें मेरे पास आने की पूरी स्वतन्त्रता है।

बापू के आशीर्वाद

मूल गुजराती से : रामदास गांधी पेपर्स। सौजन्य : नेहरू-स्मारक संग्रहालय तथा पुस्तकालय

३२५. पत्र : रामदास गांधी को

१७ मार्च, १९२४

चि॰ रामदास,

आज तो तुम्हारा पत्र प्रसन्नता से भरा है। जब उदासी और निराशा के बादल घिर आते हैं तो उनको दूर करने के लिए खुशी भी आ जाती है। यह शुभ चिह्न है। ऐसे ही प्रसन्न बने रहोगे तो सम्भव है कि यह खुशी स्थायी बन जाये।

सैसून (पूना) अस्पताल में आने के पश्चात् मैंने सोमवार का मौन बन्द कर दिया था। अब दुबारा आरम्भ किया है। यह मुझे बहुत ही अच्छा लगता है। इसके द्वारा अध्ययन और मनन का अवसर मिलता है। अब हाथ आसानी से लिख सकता है, इसलिए आज पत्र लिख रहा हूं।

नाथजी[] वहां हैं। वे सत्संग के योग्य हैं। यदि तुम्हारी इच्छा हो तो उनके पास चले जाना। संगीत तो तुमने शुरू कर ही दिया होगा।[] तुम्हें तो उसका बहुत शौक है। तुम्हारा गला भी अच्छा है और संगीत तो अत्यन्त उन्नयनकारी है।

  1. केदारनाथ कुलकर्णी
  2. गांधीजी के जुहू प्रवास के दौरान रामदास, मु॰ रा॰ जयकर की देखरेख में संगीत शिक्षा ले रहे थे।
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