३५३. पत्र: पद्मजा नायडू को
३ अक्तूबर, १९२४
आशा है, तुम्हें मेरा तार[१] मिला होगा। क्या कवियित्रियों की सभी बेटियां मूर्ख होती हैं? लगता है कि तुम्हें अपनी बीमारी अच्छी लगती है। अच्छी बनो और ठीक हो जाओ।
ढेर सा प्यार।
तुम्हारा
मो. क. गांधी
हैदराबाद (दक्षिण)
मूल अंग्रेजी से: पद्मजा नायडू पेपर्स। सौजन्य: नेहरू-स्मारक संग्रहालय तथा पुस्तकालय
३५४. पत्र: छगनलाल गांधी को
आश्विन वदी ६ [१८ अक्तूबर, १९२४][२]
यह...[३] कल श्री एण्ड्रयूज छोटी लाइन से रा[जकोट][३] जायेंगे। वहां तीन-चार दिन रहने के बाद बम्बई जायेंगे और वहां से शान्तिनिकेतन। किसी को उन्हें लेने भेजना। वल्लभभाई को भी पोस्टकार्ड लिख रहा हूं। आज अनसूयाबहिन भी जाने वाली हैं। बालकृष्ण यहां से २४ या २५ को चलेंगे। बा को तभी आने के लिए कहूंगा। जमनाबहिन और यशवंतप्रसाद भाई अभी भी यहां हैं। शायद आज पहले जितनी मात्रा में दूध ले सकूंगा। अभी (तीन बजे) तबीयत कुछ सुधरी हैं। इस हिसाब से एक सप्ताह में तो काफी शक्ति आ जायेगी।
तुम्हारा पोस्ट कार्ड मिल गया है।
सत्याग्रह आश्रम
साबरमती
मूल गुजराती (सी. डब्ल्यू. ९२३०) से। सौजन्य : छगनलाल गांधी
बापू के आशीर्वाद