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३५५. पत्र: अनसूयाबहिन साराभाई को
दिल्ली
२६ अक्तूबर, १९२४
पू. अनसूयाबहिन,
आपको हमेशा याद करता हूं। इस समय तो मेरी स्थिति ऐसी है कि जिन-जिन को मैंने पवित्र माना है उनका सत्संग तो मेरी आत्मा निरन्तर करती ही रहती है। आपको, भाई[१] को, सरलाबहिन[२] को, बच्चों को तथा नीमुबहिन को आनेवाले साल में इस संसार-यात्रा में, हम सब जिन उद्देश्यों की खोज कर रहे हैं, उन उद्देश्यों में सफलता मिले।
बापू के आशीर्वाद
अनसूयाबहिन
सेवाश्रम
मिर्जापुर
अहमदाबाद
सेवाश्रम
मिर्जापुर
अहमदाबाद
मूल गुजराती (जी. एन. ११५४३) से
३५६. तार: मथुरादास त्रिकमजी को
साबरमती
२८ नवम्बर, १९२४
मथुरादास त्रिकमजी
९३ बाजार गेट
बम्बई
९३ बाजार गेट
बम्बई
मौलाना को सूचित करो शंकरलाल अध्यक्षता करने को तैयार नहीं। विनोबा का नाम सुझाया जा सकता है। मैं ४ को लाहौर पहुंचूंगा। क्या तुम आ सकते हो?
गांधी
मूल अंग्रेजी से: प्यारेलाल पेपर्स। नेहरू-स्मारक संग्रहालय तथा पुस्तकालय। सौजन्य: बेलादेवी नैयर और डॉ. सुशीला नैयर
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