३६६. पत्र : अब्दुल कादिर बावज़ीर को
दिल्ली
२ फरवरी, १९२५
छगनलाल ने लिखा है कि आप बीमार हो गये हैं। याद रखें कि हमें बीमार होने का कोई हक नहीं है। शरीर स्वस्थ रखना हमारा कर्त्तव्य है। अमीना कुरैशी खुश होंगी और आपकी सेवा कर रही होंगी।
यहां बातचीत चल रही है। आखिर में जो होगा सो सही। कल शायद रावलपिण्डी जाना पड़ेगा। १० तारीख को वहां[१] पहुंचने की आशा है।
बापू के आशीर्वाद
सत्याग्रह आश्रम
साबरमती
गुजराती की फोटो–नकल (सी॰ डब्ल्यू॰ १०७८४) से। सौजन्य : गुलाम रसूल कुरैशी
३६७. पत्र : मथुरादास त्रिकमजी को
माघ सुदी ११ [४ फरवरी, १९२५][२]
विट्ठलभाई[३] भोज नहीं दे रहे हैं। मैंने तो कहा है कि जैसा पार्टी कहे वैसा करो। तुम्हें भोज में जाने की जरूरत नहीं है। ज्यादा बाद में समझाऊंगा।
बापू के आशीर्वाद
९३ बाजार गेट स्ट्रीट
फोर्ट, बम्बई
मूल गुजराती से : प्यारेलाल पेपर्स। नेहरू-स्मारक संग्रहालय तथा पुस्तकालय; सौजन्य : बेलादेवी नैयर और डॉ॰ सुशीला नैयर