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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 91.pdf/३६०

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३९६. पत्र : मथुरादास त्रिकमजी को

वैशाख वदी १० [१७ मई, १९२५][]

चि॰ मथुरादास

तुम्हारा पत्र मिला। तुम्हारी तबीयत बिलकुल ठीक हो गई होगी। ब्राह्मण को गाय दान में देने का अर्थ मैं इस प्रकार करूंगा—

गरीब व्यक्ति जो गाय का पालन कर सके और जिसे गाय की जरूरत हो।

गौ का पालन करनेवाली और गरीबों को सस्ता दूध देनेवाली संस्था।

बम्बई में तो कोई ब्राह्मण मिलनेवाला ही नहीं। बम्बई में गाय पालने की व्यवस्था भी नहीं है इसलिए अन्त में तुम्हें नकद पैसे ही देने पड़ेंगे। मेरी सलाह यह है कि फिलहाल तो अच्छी गाय की कीमत के पैसे सूद पर चढ़ा दो और मैंने जिस काम को हाथ में लिया है यदि वह सफल हो तो तुम वह पैसा उसमें दे देना अन्यथा उसे किसी योग्य संस्था को देने की बात सोचेंगे।

बापू के आशीर्वाद

[पुनश्च:]

आनन्द[] से मुझे कुछ लेना तो था ही न?

चि॰ मथुरादास त्रिकमजी
९३, बाजार गेट स्ट्रीट
फोर्ट, बम्बई

मूल गुजराती से : प्यारेलाल पेपर्स। नेहरू–स्मारक संग्रहालय तथा पुस्तकालय; सौजन्य : बेलादेवी नैयर और डॉ॰ सुशीला नैयर

  1. डाक की मोहर पर '१९ मई, १९२५ ' तारीख पड़ी हुई। इस वर्ष वैशाख वदी १०, १७ मई को थी।
  2. २५ अप्रैल, १९२५ को आनन्द का देहान्त हो गया था; देखिए "मथुरादास त्रिकमजी को लिखे पत्र का अंश", १८-५-१९२५।
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