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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 91.pdf/३६३

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४००. पत्र : ख्वाजा अब्दुल मजीद को

यात्रा में
३० मई, १९२५

प्रिय ख्वाजा साहब,

आखिर आपका पत्र मिल गया। मुझे आशा है कि आपका दिल्ली का तबादला बिना किसी कठिनाई के हो सकेगा। मेरे खयाल से आप तबादले के बाद अपनी अपील करें तो बेहतर होगा। मुझे खेद है, जब तक आप विश्वविद्यालय में काम कर रहे हैं तब तक आप विधानमण्डल के सदस्य नहीं बन सकते।

हृदय से आपका
मो॰ क॰ गांधी

ख्वाजा साहब अब्दुल मजीद
राष्ट्रीय मुस्लिम विश्वविद्यालय
अलीगढ़

मूल अंग्रेजी से : ए॰ एम॰ ख्वाजा पेपर्स। सौजन्य : नेहरू–स्मारक संग्रहालय तथा पुस्तकालय

४०१. पत्र : शंकरलाल बैंकर को

सुधारकर पढ़ना

शनिवार, ज्येष्ठ सुदी ७ [३० मई, १९२५][]

भाईश्री शंकरलाल,

आपका पत्र मिला। लम्बा है उसकी कुछ चिन्ता नहीं। कार्य–समिति की बैठक तो हुई नहीं। केवल तीन ही सदस्य[] उपस्थित थे। मैंने डॉ॰ नायडू के विचार जान लिये हैं। बुधवार को दार्जिलिंग में देशबन्धु से मिलूंगा तब उनके विचार भी जान लूंगा। परिणाम चाहे कुछ भी हो, आप तो निश्चिन्त होकर काम करें। यदि हम अपने कर्त्तव्य का ठीक पालन कर रहे हैं तो हमें चिन्ता नहीं करनी चाहिए।

मैंने अर्जुनलाल सेठी को तार दिया है कि कार्य समिति की बैठक तो हुई नहीं लेकिन इस सम्बन्ध में मैं अपनी व्यक्तिगत राय देने के लिए तैयार हूं। उन्हें भी जो कुछ कहना हो उसे एक सप्ताह के भीतर बता देना चाहिए। कार्य–समिति की बैठक दुबारा बुलाने का विचार है। उस समय

  1. तिथि का निर्धारण पत्र के पाठ से किया गया है। १९२५ में ज्येष्ठ सुदी ७, शनिवार, ३० मई को हो थी।
  2. अर्थात् गांधीजी व जवाहरलाल नेहरू और डॉ॰ वरदराजुलु नायडू; देखिए "पत्र : सरोजनी नायडु को", ३०-५-१९२५।
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