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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 91.pdf/३७०

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सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय

 

तुम्हें और पद्मजा को स्नेह,

हृदय से तुम्हारा
मो॰ क॰ गांधी

[पुनश्च:]

मेरा दाहिना हाथ सारे दिन की मेहनत के बाद काम करने से जवाब दे रहा है। अतः यह बायें हाथ से लिखा गया है।

क्या तुम १६ तारीख को आ रही हो?

मूल अंग्रेजी से : पद्मजा नायडू पेपर्स। सौजन्य : नेहरू–स्मारक संग्रहालय तथा पुस्तकालय


४०९. पत्र : अनसूयाबहिन साराभाई को

मिदनापुर
आषाढ वदी १ [७ जुलाई, १९२५][]

चि॰ अनसूयाबहिन,

दाहिना हाथ काम करते-करते थक गया है, इसलिए बायें हाथ से लिख रहा हूं। मेरी भावनाओं का चित्रण तो आपने कुछ 'नवजीवन' तथा 'यंग इंडिया' में देखा होगा। अब मैं दुबारा बंगाल का बाकी का सफर कर रहा हूं। इन आठ दिनों में सारा पूरा हो जायेगा।

एक महिला ने भेंट दी है, जो भेजने योग्य है इसीलिए तुम्हें भेज रहा हूं।

मेरा सारा प्रोग्राम फिलहाल गड़बड़ हो गया है इसलिए मैं कुछ निश्चित रूप से नहीं लिख सकता। इस पूरे महीने तो मैं यहीं हूं। इसके बाद का १६ तारीख के बाद तय होगा।

तुम्हारी और भाई शंकरलाल की तबीयत अच्छी होगी। इस बार न तो महादेव मेरे साथ हैं और न क्रिस्टोदास। महादेव को पैसे इकट्ठे करने के लिए छोड़ आया हूं और क्रिस्टोदास को तबीयत सुधारने के लिए भेजा है।

बापू के आशीर्वाद

[पुनश्च:]

सतीशबाबू मेरे साथ हैं।

मूल गुजराती (एस॰ एम॰ ३२७८८) से

  1. १९२५ में इस तारीख को गांधीजी मिदनापुर में थे। आषाढ़ वदी १ भी ७ जुलाई को ही थी।
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