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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 91.pdf/३७४

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४१४. पत्र : घनश्यामदास बिड़ला को

श्रावण कृष्ण ११ [१४ अगस्त, १९२५][]

भाईश्री घनश्यामदासजी,

आपका खत मिला है। पिताजी की तबीयत अब अच्छी होगी। पं॰ सुन्दरलालजी के लीये जो कुछ मैं लिख सकता था मैंने लिखा। हिंदु–मुसलमान झगड़े का काम दिन–प्रति–दिन कठिनतर होता जाता है। मेरी सूचना आप चाहते हैं उसीकी बुनियाद है। यदि दिल्ली के झगड़े को अच्छी तरह से तेहकीकात हो सके तो उस पर से ज्यादा काम हो सकता है। मैं बिलकुल मानता हूं कि आखर में कई नेताओं को अपना शरीर का बलिदान देना पड़ेगा।

आपका
मोहनदास

श्री घनश्यामदास बिड़ला
१३७, कैनिंग स्ट्रीट,
कलकत्ता

बापूकी प्रेम प्रसादी, पृ॰ ३०

४१५. टिप्पणी : दर्शक–पुस्तिका में

२० अगस्त, १९२५

मैं इस आश्रम[] में आ पाया, यह मेरा सौभाग्य है।

मो॰ क॰ गांधी

अंग्रेजी की फोटो–नकल (जी॰ एन॰ ११०१७) से

४१६. एक प्रमाण–पत्र

२८ अगस्त, १९२५

एफ॰ एन॰ गुप्टू एण्ड क॰,

इस पेंसिल और पैन होल्डर के कारखाने में आकर मुझे अत्यन्त प्रसन्नता हुई। मुझे यह

  1. साधन–सूत्र में यहां १६-७-१९२५ दी गई है, मगर १९२५ में श्रावण कृष्ण ११, १४ अगस्त को थी।
  2. कटक का कुष्ठ–रोगी आश्रम
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