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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 91.pdf/३७६

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सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय
[पुनश्च:]

  फूलचन्द भाई का पत्र आया है, उसे भेज रहा हूं। उसे पढ़कर, रामजी भाई और जयसुखलाल को पढ़वाकर फाड़ देना।

मूल गुजराती से : रामदास पेपर्स। सौजन्य : नेहरू–स्मारक संग्रहालय तथा पुस्तकालय


४१८. पत्र : मोतीलाल राय को

१५ सितम्बर, १९२५

प्रिय मोतीबाबू,

मैं आपका पत्र अपने साथ लाया हूं ताकि मुझे यह याद रहे कि आपको उत्तर देना है। कृपया मुझे सूचित करते रहें कि वहां आप क्या कर रहे हैं और क्या हो रहा है। मैं अक्तूबर के अन्त तक बिहार में ही इधर-उधर रहूंगा। बिहार के दौरे पर मेरा पता पटना का ही रहेगा। मैं १९ तारीख को पटना पहुंचूंगा और वहां २४ तारीख तक रहूंगा।

हृदय से आपका
मो॰ क॰ गांधी

अंग्रेजी की फोटो–नकल (जी॰ एन॰ ११०१९) से

४१९. टिप्पणी : दर्शक–पुस्तिका में[]

भाद्र कृष्ण १७ सितम्बर, १९२५

इस संस्था की मैं सर्व प्रकार से उन्नति चाहता हूं। इस संस्था का मेरे मन पर अच्छा असर पड़ा है। चरखे की प्रवृत्ति में मैं अच्छा ज्ञान और अभ्यास की आशा रखता हूं।

मोहनदास गांधी

आटोबायोग्राफी ऑफ ए योगी, पृ॰ ४६५

  1. गांधीजी ने यह टिप्पणी रांची के स्वामी योगानन्द के ब्रह्मचर्याश्रम में पहुंचकर लिखी थी।
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