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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 91.pdf/४०१

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४६६. पत्र : मथुरादास त्रिकमजी को

सोमवार, [४ जनवरी, १९२६][]

चि॰ मथुरादास,

तुम्हारे दो पत्र मिले। तुम बम्बई नगर निगम के सदस्य बने रहो, यह ठीक ही है। और यदि तुम्हारी अनुपस्थिति में भी तुम्हारा चुनाव हो जाये तो यह बहुत ही शुभ चिह्न होगा।

इसमें कोई सन्देह नहीं है कि तुम्हें आराम तो पूरा ही करना चाहिए। और दूसरी कोई दवा नहीं चाहिए। फिलहाल तो जिससे ज्यादा जोश आ जाये ऐसी बातें न करने में ही फायदा है। इस समय तो तुम्हें निर्मल और शान्त आनन्द की आवश्यकता है। देवदास के लिखने से देखता हूं कि तारामती की स्थिति तो बिल्कुल अच्छी मानी जा सकती है। कुछ बूंदाबांदी यहां भी हो गई। अब की बार सर्दी भी बहुत कम ही पड़ी थी।

बापू के आशीर्वाद

[पुनश्च:]

रामदास कल अचानक यहां पहुंच गया है।

मूल गुजराती से : प्यारेलाल पेपर्स। नेहरू–स्मारक संग्रहालय तथा पुस्तकालय; सौजन्य : बेलादेवी नैयर और डॉ॰ सुशीला नैयर

४६७. पत्र : मोतीलाल राय को

साबरमती
१२ जनवरी, १९२६

प्रिय मित्र,

मुझे आपका सूत और स्याही प्राप्त करके बहुत प्रसन्नता हुई। आपको इसकी रसीद कार्यालय से मिल जायेगी। मेरी इच्छा है कि संघ का हरएक सदस्य अखिल भारतीय चरखा संघ में शामिल हो जाये।

हृदय से आपका
मो॰ क॰ गांधी

श्रीयुत मोतीलाल राय
प्रवर्तक संघ
चन्द्रनगर

अंग्रेजी को फोटो–नकल (जी॰ एन॰ ११०२४) से

  1. मथुरादास को यह पत्र ५ जनवरी, १९२५ को मिला था।
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