४९५. पत्र : मथुरादास त्रिकमजी को
आश्रम, साबरमती
चैत्र सुदी १० [२२ अप्रैल, १९२६][१]
आजकल तुम्हारा कोई पत्र नहीं मिला है। मैने महादेव से कह दिया था कि वह तुम्हें बता दे कि मेरा मसूरी जाना रद्द हो गया है। अगर महाबलेश्वर जाने की बात होगी तो मैं तुम्हारे साथ एक या दो दिन बिताने की कोशिश करूंगा।
बापू के आशीर्वाद
मूल गुजराती से : प्यारेलाल पेपर्स। नेहरू स्मारक संग्रहालय तथा पुस्तकालय: सौजन्य : बेलादेवी नैयर और डॉ॰ सुशीला नैयर
४९६. पत्र : मथुरादास त्रिकमजी को
साबरमती
२३ अप्रैल, १९२६
तुम्हारा पत्र मिला। तुम्हारे फेफड़ों में सुधार धीरे–धीरे ही होगा, यह तो हम सब समझ ही चुके हैं। एक दृष्टि से तो यह मजबूरन मिली शान्ति स्वागत योग्य है। तुम इसका सदुपयोग कर रहे हो। देवदास के लिए कोई भी कार्यक्रम नहीं बनाया है। लेकिन जब तक उसका स्वास्थ्य बिल्कुल ठीक न हो जाये तब तक उसे वहां भेजने की मेरी इच्छा नहीं हो रही है। प्यारेलाल [का साथ] तुम्हें अनुकूल तो है न? अगर किसी तरह की कोई परेशानी हो तो मुझे बता दो। अगर महाबलेश्वर जाता तो देवलाली [भी] जाने का इरादा था। लेकिन वह मुल्तवी हो गया है, क्योंकि अब महाबलेश्वर जाने की बात नहीं रह गई हैं। गवर्नर लिखते हैं कि जून महीने में जब वे नीचे आयेंगे तब उनसे मिलना ठीक रहेगा।
फिनलैण्ड के बारे में भेजा हुआ तार तुम अखबार में देखोगे।[२] मुझे अब तक कोई पत्र नहीं मिला है। वहां जाने की मेरी बिल्कुल इच्छा नहीं हो रही है। एक घण्टे के लिए भी आश्रम छोड़ना अच्छा नहीं लगता। तीन–चार दिन से अम्बालाल भाई के यहां सरलाबहिन की तबीयत पूछने जाने की सोच रहा हूं, लेकिन घूमने के अलावा और समय कहां से निकालूं यह मेरे लिए एक महत्वपूर्ण प्रश्न बन गया है। जाऊंगा, लेकिन केवल धर्म समझकर।
बापू के आशीर्वाद
मूल गुजराती से : प्यारेलाल पेपर्स। नेहरू स्मारक संग्रहालय तथा पुस्तकालय; सौजन्य : बेलादेवी नैयर और डॉ॰ सुशीला नैयर