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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 91.pdf/४१९

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४९७. पत्र : जैकब हीबल को

आश्रम, साबरमती
२३ अप्रैल, १९२६

प्रिय मित्र,

आपका पत्र मिला। यदि 'मेरे सत्य के प्रयोग' किसी पत्रिका में प्रकाशित करने की बात है तो इसमें कोई कठिनाई नहीं है। लेकिन यदि पुस्तक रूप में इसके प्रकाशन का प्रश्न है तो श्री रॉनिगर[] पहले से ही मेरे साथ इस विषय पर पत्र–व्यवहार कर रहे हैं। और हर हालत में कथानक पूरा होने में कुछ समय लगेगा।

जर्मन युवा आन्दोलन में मेरी बड़ी गहरी रुचि है, क्योंकि मुझे जर्मनी के उद्यमी, बहादुर और आत्म-बलिदानी युवक–युवतियों से काफी अपेक्षा है।

हृदय से आपका

श्रीमान जैकब हीबल
५४९, वे॰ नार्थ एवेन्यू, एपी, एफ, शिकागो
यू॰एस॰ए॰

अंग्रेजी की नकल (एस॰ एन॰ ३२२४८) से

४९८. पत्र : मथुरादास त्रिकमजी को

आश्रम, साबरमती
बुधवार [ २८ अप्रैल, १९२६][]

चि॰ मथुरादास,

तुम्हारा पत्र मिला। अब तो तुम्हें देवलाली छोड़ना ही है। जब बहुत से डॉक्टरों ने वही सलाह दी है तब तो उसे छोड़ना ही अच्छा है। माथेरान के बजाय सिंहगढ़ ज्यादा अच्छा है। तुम वहां जाओ, यही अच्छा है। जून महीने के पहले सप्ताह तक वहां रह सकते हो। जून महीने में तो देवलाली में भी ठण्डक होगी। लेकिन उस समय तो पंचगनी में भी बंगला मिलने में कोई अड़चन नहीं होगी। इसलिए तुम जहां रहना चाहो वहां रह सकोगे। तुरन्त निश्चय करके सिंहगढ़ जाओ, वही ठीक है। प्यारेलाल फिलहाल चुप है।

बापू के आशीर्वाद

मथुरादास त्रिकमजी
विंडी हाल
नासिक रोड
देवलाली (जी॰आई॰पी॰)[]

मूल गुजराती से : प्यारेलाल पेपर्स। नेहरू स्मारक संग्रहालय तथा पुस्तकालय; सौजन्य : बेलादेवी

नैयर और डॉ॰ सुशीला नैयर

  1. एमिली रॉनिगर
  2. डाक की मोहर पर से
  3. पता अंगेजी में है।
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