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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 91.pdf/४२०

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४९९. पत्र : मथुरादास त्रिकमजी को

आश्रम, साबरमती
शनिवार [१ मई, १९२६][]

चि॰ मथुरादास,

तुम्हारा पत्र मिला। अब तो तुम्हें पंचगनी ही जाना चाहिए। मैं पंचगनी के लिए नरगिस बहिन[] की मार्फत इन्तजाम कर रहा हूं। किराया देकर भी वहां एक महीना तो रहना ही चाहिए। और इसके बाद पट्टणी साहब के बंगले में रह सकते हो। वह बंगला जून में तो मिल ही जायेगा। एण्ड्रयूज के स्वागत के लिए तुम्हारे बदले देवदास कल रात बम्बई गया है।[] सोमवार को लौटेगा। उसने तुम्हारे पास होकर आने की मांग की थी, लेकिन मैंने मना कर दिया। उसका शरीर कमजोर ही है। आंखें साफ नहीं हैं। कुछ और ताकत आने के बाद ही घूमना–फिरना करें तो ठीक होगा।

बापू के आशीर्वाद

श्रीयुत मथुरादास त्रिकमजी
विंडी हाल
नासिक रोड
देवलाली (जी॰आई॰पी॰)[]

मूल गुजराती से : प्यारेलाल पेपर्स। नेहरू स्मारक संग्रहालय तथा पुस्तकालय; सौजन्य : बेलादेवी नैयर और डॉ॰ सुशीला नैयर

५००. पत्र : रामकृष्ण चांदीवाला को

आश्रम, साबरमती
शनिवार [१ मई, १९२६][]

भाई रामकृष्णजी[],

आपकी जेष्ठ पुत्री के स्वर्गवास की खबर भाई ब्रजकृष्ण ने मुझे दी है। सुनकर में दिलगीर

  1. डाक की मोहर पर से।
  2. नरगिस कैप्टेन, देखिए "पत्र : नरगिस कैप्टन को", १-५-१९२६।
  3. १ मई, १९२६ को दक्षिण आफ्रीका से सी.एफ. एण्ड्रयूज की वापसी पर गांधीजी के सन्देश के लिए देखिए "संदेश : दक्षिण आफ्रिका से एण्ड्रयूज की वापसी पर", १-५-१९२६।
  4. पता अंग्रेजी में है।
  5. डाक की मोहर पर से
  6. ब्रजकृष्ण चांदीवाला के भाई
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