५२४. पत्र : मूलचन्द अग्रवाल को
आश्रम, साबरमती
गुरुवार, १५ जुलाई, १९२६
आपका खत मिला। खादी को अपना केन्द्र बनाकर विद्यादान भी उसी के मारफत देने का आपका निश्चय मुझको तो बहुत ही प्रिय है। आपके तरफ से खादी के बारे में लोकोपयोगी खबर आ जाएगी तो अवश्य 'नवजीवन' में प्रगट करूंगा।
आपका
मोहनदास गांधी
मोनपुर (मध्यप्रान्त)
पत्र की नकल से : हरिभाऊ उपाध्याय पेपर्स। सौजन्य : नेहरू स्मारक संग्रहालय तथा पुस्तकालय
५२५. पत्र : मथुरादास त्रिकमजी को
आश्रम, साबरमती
शुक्रवार [१६ जुलाई, १९२६][१]
तुम्हारा पत्र मिला। डॉ॰ चन्दूलाल को लिखा, यह अच्छा किया। पेट का दर्द तो बिल्कुल ठीक होना ही चाहिए।
मेरी तबीयत अच्छी ही है। कुछ दिन मुझे आघासीसी की तकलीफ रही। मिट्टी बांधने से वह बिल्कुल ठीक हो गई है। यदि तारामती ने अब भी पत्र न लिखा हो तो उसे कहो कि मैं इन्तजार करूंगा।
बापू के आशीर्वाद
मूल गुजराती से : प्यारेलाल पेपर्स। नेहरू स्मारक संग्रहालय तथा पुस्तकालय; सौजन्य : बेलादेवी नैयर और डॉ॰ सुशीला नैयर
- ↑ डाक की मोहर पर से