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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 91.pdf/४३९

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पत्र : मथुरादास त्रिकमजी को

दवा की कैद से छूट सको, यह तो मुझे भी अच्छा लगेगा। सांस की तकलीफ का कुछ इलाज हो जाना चाहिए। इसकी वजह डॉक्टर क्या बताते हैं? तारमती का पत्र आखिर आ ही गया। उसका जवाब बाद में लिखूंगा।

बापू के आशीर्वाद

श्रीयुत मथुरादास त्रिकमजी
होमी विला
पंचगनी

मूल गुजराती से : प्यारेलाल पेपर्स। नेहरू स्मारक संग्रहालय तथा पुस्तकालय; सौजन्य : बेलादेवी नैयर और डॉ॰ सुशीला नैयर

५३०. पत्र : मथुरादास त्रिकमजी को

आश्रम, साबरमती
आषाढ़ वदी १३, शुक्रवार [६ अगस्त, १९२६][]

चि॰ मथुरादास,

तुम्हारा पत्र मिला। सितम्बर में बम्बई हो आने की बात मुझे तो उल्टी लग रही है। इसके बजाय, फुर्सत मिलने पर डॉ॰ जीवराज ही वहां क्यों न हो आयें? तुम्हारे स्वास्थ्य में जो सुधार हुआ है उसे बिल्कुल भी जोखिम में न डाला जाये, मुझे तो यही जरूरी लग रहा है। प्यारेलाल केसियस की तरह बहुत ही सोचने वाला प्राणी है। इसलिए उसके चेहरे पर लाली आना बहुत मुश्किल बात है। वह अपना स्वास्थ्य अच्छा रखे, उसके लिए तो यही बहुत होगा। यह मैं जानता हूं कि पंचगनी में मौसम सबसे अच्छा है। इसका प्यारेलाल जितना लाभ उठा सकता है उठा ले। तारामती को पत्र लिखना मैं भूला नहीं हूं, लेकिन मुझे लम्बे अर्से तक जो प्रतीक्षा करनी पड़ो उसका मैं बदला क्यों न लूं?

बापू के आशीर्वाद

मूल गुजराती से : प्यारेलाल पेपर्स। नेहरू स्मारक संग्रहालय तथा पुस्तकालय; सौजन्य : बेलादेवी नैयर और डॉ॰ सुशीला नैयर

  1. डाक की मोहर पर से
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