५३३. पत्र : मथुरादास त्रिकमजी को
आश्रम, साबरमती
श्रावण सुदी ७, १९८२, [१५ अगस्त, १९२६]
तुम्हारा पत्र मिला। दर्द तो अब बिलकुल ही चला गया होगा। जब बंगला खाली करना पड़ेगा तब और कोई ध्यान में है क्या? देवदास अभी मसूरी में ही है और वहां वह कुछ और रहना चाहता है।
बापू के आशीर्वाद
मूल गुजराती से: प्यारेलाल पेपर्स। नेहरू-स्मारक संग्रहालय तथा पुस्तकालय: सौजन्य: बेलादेवी नैयर और डॉ॰ सुशीला नैयर}}
५३४. पत्र : मथुरादास त्रिकमजी को
आश्रम, साबरमती
श्रावण वदी १, मंगलवार [२४ अगस्त, १९२६][१]
तुम्हारा पत्र मिला है। कल कुमारी हॉसडिंग के बारे में पत्र[२] लिखा था वह मिला होगा। पट्टणी साहब का बंगला किराये पर तो जरूर ले सकते हैं। और अगर कोई दूसरा नहीं मिलता तो उनसे उसी बंगले की मांग करने में मैं हिचकिचानेवाला नहीं हूं।
बापू के आशीर्वाद
मूल गुजराती से : प्यारेलाल पेपर्स। नेहरू-स्मारक संग्रहालय तथा पुस्तकालय; सौजन्य: बेलादेवी नैयर और डॉ॰ सुशीला नैयर