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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 91.pdf/४४४

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५३९. पत्र : मोतीलाल राय को

५ सितम्बर १९२६

प्रिय मोती बाबू,

मुझे आपका पत्र और रिपोर्ट मिली।

आश्चर्य है कि कैसे आपके ऊपर एक के बाद एक मुसीबतें आई हैं।

मैं मैनेजर से कह रहा हूं कि वह 'यंग इंडिया' की मानार्थ प्रति भेजने के लिए संघ का नाम दर्ज कर ले।

मुझे आशा है कि आपके सूत की किस्म में सुधार होगा। आपको मालूम ही है कि अब हमने सूत की मजबूती तथा ताने को परखने की पद्धति शुरू कर दी है।

हृदय से आपका
मो॰ क॰ गांधी

अंग्रेजी की फोटो नकल (जी. एन. ११०२९) से

५४०. पत्र : बनारसीदास चतुर्वेदी को

आश्रम, साबरमती
श्रावण अमावस्या, मंगलवार, ७ सितम्बर १९२६

भाई बनारसीदासजी,

आपका पत्र मिला है। आज आपको कुछ करने का नहीं रहता है।

आपका
मोहनदास

[पुनश्चः]

हां, वजे[] है। क्योंकि अब वह भी कुछ काम में नहिं है। उनकी पेरवी करूंगा। यदि दोनों आ जाओगे तो काफी है। देवदास को पूछना चाहते हो तो अवश्य पूछो परन्तु मेरा ख्याल है कि वह नहिं आवेगा। अपनी मर्यादा को समझते हुवे।

मूल पत्र से: बनारसीदास चतुर्वेदी पेपर्स। सौजन्य: राष्ट्रीय अभिलेखागार

  1. एस॰ जी॰ वजे
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