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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 91.pdf/४५०

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सम्पूर्ण गांधी वाङ्‌मय

कितनों की जमीनें बड़े जमींदारों ने हड़प ली हैं, इन सब बातों का प्रमाण चाहिए। हम जो खबरें सुनते हैं उनकी सच्चाई जानने का प्रयत्न नहीं करते। इस रिपोर्ट के विषय में मुझे बहुत कुछ कहना है। इस रिपोर्ट के आधार पर लड़ाई आरम्भ नहीं की जा सकती है। यह रिपोर्ट तथ्यों के संग्रह के रूप में तो अच्छी है। वकील की दलील के रूप में भी शायद चल जाये। परन्तु तुलना की दृष्टि से ठीक नहीं रहेगी। ऐसा मानता हूं।

इन प्रश्नों में खूब गहरे जाना होगा। मुझे तो लगता है कि लोगों को जेल जाने, अपने खेत छोड़ने और भुखमरी कबूल करने की सलाह देने के लिए तुम्हारे द्वारा एकत्रित किये गये इन आंकड़ों की अपेक्षा एक अन्य ही प्रकार का मसाला चाहिए। यदि अब तक चली आ रही प्रथा को बदलने के ख्याल से हम लड़ाई शुरू करते हैं तो फिर वह लम्बे समय तक चलेगी। मुझे नहीं लगता कि ये खेतिहर इतना बोझ उठाने के लिए अभी तैयार हैं।

गुजराती की फोटो नकल (एस॰ एन॰ ११४५०) से

५५१. पत्र : रामी पारेख को

सोमवार [११ अक्तूबर, १९२६][]

चि॰ रामी,

तुम्हारा पत्र मिला। स्याही से लिखने की आदत डालो। फिलहाल तो यहां सब ठीक है। तुमने पढ़ने का और कातने का क्रम रखा है क्या?

इन दिनों आश्रम में काफी लोग हैं। चरखा द्वादशी के दिन तो बहुत से लोग बाहर से आये थे।

बापू के आशीर्वाद

गुजराती की फोटो नकल (एस॰ एन॰ ९७०१) से

५५२. पत्र : रामदास गांधी को

आश्रम, साबरमती
मंगलवार, १३ अक्तूबर, १९२६

चि॰ रामदास,

तुम्हारा पत्र बहुत दिनों के बाद मिला। तुमने कठिन व्रतों का आरम्भ किया है। ईश्वर तुम्हारी सहायता करे। मेरी यह तीव्र इच्छा अवश्य है कि खादी के प्रति तुम पूर्णरूप से समर्पित हो

  1. एस॰ एन॰ रजिस्टर से
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