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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 91.pdf/४६५

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५७६. पत्र : अनसूयाबहिन साराभाई को

मौनवार [२४ जनवरी १९२७][]

चि. अनसूयाबहिन,

आज हम बेतिया में हैं। तुम्हारा पत्र मिला है। बिस्कुटों के बारे में सुबैया ने उतावली में लिख दिया। यहां तो ढेरों मक्खन मिलता है। इसलिए बा कुछ भी बना सकती है। तुम्हारी पेटी आने पर उसका उपयोग करूंगा। लेकिन अब न भेजना। मार्च में तो मिलेंगे ही। अगर पोरबन्दर आ सकती हो तो आ जाओ।

तुम्हारा स्वास्थ्य तो अच्छा रहता है न? लगता है कि आश्रम में पानी-घर (वाटर वर्क्स) बनाने पड़ेंगे। नये स्वस्थ लोग आये हैं, परन्तु वे भी बीमार होते रहते हैं। इसका कारण पानी ही होना चाहिए। इस मामले में अगर कोई कुशल आदमी भाई के ध्यान में हो तो उससे कहो कि वह खर्च का अन्दाजा भेजे।

मगनलाल को मैंने वल्लभभाई से मिलने को लिखा ही है।

सकलातवाला[] का तार आया था। उसका जवाब मैंने तुम्हारे पते पर भेजा, वह तुमने देखा होगा। वह मुझे नागपुर या वर्धा में ३ या ४ तारीख के आसपास मिल सकता है।[]

दो अमेरिकी महिलाएं मुझसे यहीं आकर मिल गई। कैसा मोह है।

हम ३०-३१ को पटना में हैं। १ को कलकत्ता, २-७ को गोंदिया, फिर नागपुर-वर्धा। इसके बाद जमनालालजी जाने।

बापू के आशीर्वाद

गुजराती की फोटो नकल (एस. एन. ३२८२७) से

५७७. पत्र : मृदुला साराभाई को

बेतिया
मौनवार [२४ जनवरी १९२७][]

चि. मृदु.

तुम्हें याद तो बहुत बार करता हूं। अपना पिछला संवाद मुझे याद है। अपने विचार पर दृढ़ रहनेवालों को तो दूसरे के मतभेद के प्रति अत्यन्त उदार होना ही चाहिए। जहां मतभेद ही न हों, वहां उदारता के लिए कोई स्थान नहीं। उदारता का उपयोग ही मतभेद सहन करने में है। दुनिया में

  1. इस दिन गांधीजी बेतिया में थे।
  2. शापुरजी सकलातवाला, कम्युनिस्ट नेता और ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स के सदस्य
  3. सकलातवाला के साथ गांधीजी की भेंट के लिए देखिए "भेंट: शापुरजी सकलातवाला से" ५-२-१९२७।
  4. अनसूयाबहिन साराभाई के नाम लिखे २४-१-१२९७ के पत्र से।
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