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६५८. पत्र: मोतीलाल राय को
आश्रम, साबरमती
१४ फरवरी, १९२८
प्रिय मित्र,
आपका पत्र मिला। लेकिन यदि आप आते तो मुझे कोई परेशानी नहीं होती और आपके साथ रहने का आनन्द प्राप्त होता। मैं अब इस बात पर जोर नहीं देता, क्योंकि सर्दी का सबसे बढ़िया समय बीत चुका है। लेकिन यदि आप यहां की सूखी सर्दी सहन कर सकते हैं तो आपका सदैव स्वागत है। आप कभी भी आ सकते हैं।
मेरे स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है। इस बारे में आपको 'यंग इण्डिया' में और जानकारी मिलेगी।[१]
हृदय से आपका
मो. क. गांधी
पोस्टकार्ड पर पता:
श्रीयुत बाबू मोतीलाल राय
चन्द्रनगर
बंगाल
श्रीयुत बाबू मोतीलाल राय
चन्द्रनगर
बंगाल
अंग्रेजी की फोटो नकल (जी. एन. ११०३५) से
६५९. पत्र: कुंवरजी पारेख को
[२१ फरवरी, १९२८][२]
चि. कुंवरजी,
तुम्हारा पत्र मिला है। मेरा स्वास्थ्य अच्छा है। चि. रामी आदि रामदास के साथ गुरुवार दिन रवाना होंगे। राजकोट होकर दो-तीन दिन में तुम्हारे पास पहुंचेंगे।
बापू के आशीर्वाद
गुजराती की फोटो नकल (एस. एन. ९७०६) से
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