७१८. पत्र : मथुरादास त्रिकमजी को
शनिवार [२७ अक्तूबर, १९२८][१]
बहुत दिनों के बाद तुम्हारा पत्र आया है। बिना परिश्रम किये अगर एक दिन आ सको तो मुझे अच्छा लगेगा। लेकिन शरीर को थकाना बिलकुल नहीं है। इन दिनों यहां बुखार की हवा चल रही है। लगता है कि इस मौसम में किसानों के घरों में बुखार होता ही है। डॉ. जीवराज की सलाह के अनुसार तुम्हें एक साल और पहाड़ के शान्त वातावरण में रहना है।
महादेव फिलहाल बारडोली में है। रविवार के दिन बम्बई में होगा। मुझे तो तुम्हारे अल्मोड़ा जाने की बात बहुत अच्छी लगेगी। प्रभुदास को तो बहुत लाभ हुआ है।
बापू के आशीर्वाद
मूल गुजराती से: प्यारेलाल पेपर्स। नेहरू-स्मारक संग्रहालय तथा पुस्तकालय; सौजन्य: बेलादेवी नैयर और डॉ. सुशीला नैयर
७१९. पत्र : पद्मजा नायडू को
आश्रम, साबरमती
४ नवम्बर, १९२८
यह केवल तुम्हारे पत्र का उत्तर देने और यह बताने के लिए लिख रहा हूं कि तुम सदैव मेरे ध्यान में रहती हो। क्या चिकित्सकीय निषेध अभी जारी है?
सप्रेम,
मो. क. गांधी
टी. बी. सैनिटोरियम
आरोग्यवरम्
द. भारत
मूल अंग्रेजी से: पद्मजा नायडू पेपर्स। सौजन्य : नेहरू-स्मारक संग्रहालय तथा पुस्तकालय
- ↑ डाक की मोहर पर से