७२०. पत्र : मृदुला साराभाई को
रविवार [४ नवम्बर, १९२८][१]
महादेव तो अभी बारडोली कमेटी के प्रसंग में बम्बई में ही है। मेरी तबीयत अच्छी है। अभी तक तो बुखार नहीं आया पर आया भी तो कल की अपेक्षा तो तबीयत अच्छी ही कही जायेगी। फल पहुंच गये हैं।
मोहनदास के आशीर्वाद
गुजराती की फोटो नकल (जी. एन. ११२६४) से। सौजन्य : साराभाई फाउण्डेशन
७२१. पत्र : मथुरादास त्रिकमजी को
आश्रम, साबरमती
६ नवम्बर, १९२८
तुम्हारा पत्र मिला है। मेरा पत्र और मेरे आशीर्वाद तो इस पत्र के पहले ही मिल गये होंगे। वहां की हवा देवलाली से ज्यादा पसंद आ जाये तो यह तो सोने में सुहागा है। फिर मेरा अल्मोड़ा का आग्रह नहीं रहेगा। मैं यहां से २३ को रवाना होकर बारडोली होते हुए वर्धा जाऊंगा। इसलिए बम्बई रास्ते में नहीं पड़ेगा। महादेव अभी बारडोली में ही है। कल आयेगा।
बापू के आशीर्वाद
मूल गुजराती से: प्यारेलाल पेपर्स। नेहरू-स्मारक संग्रहालय तथा पुस्तकालय; सौजन्य : बेलादेवी नैयर और डॉ. सुशीला नैयर
- ↑ स्पष्ट है कि यह पत्र नवम्बर, १९२८ में लिखा गया था। उस समय महादेव देसाई बारडोली मामले की जांच के सिलसिले में नवम्बर के प्रथम सप्ताह में बम्बई और बारडोली में थे। इस दौरान रविवार ४ नवम्बर को था: देखिए "पत्र: एन. आर. मलकानी को", ३-११-१९२८ और "पत्र: महादेव देसाई को", ५-११-१९२८।