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३. पत्र : फिरोजशाह मेहता को
सेंट्रल वेस्ट स्ट्रीट
डर्बन
९ अगस्त, १८९५
माननीय फिरोजशाह मेहता
एम॰ आर॰ सी॰ एण्ड सी॰ एण्ड सी॰
बम्बई
महोदय,
एम॰ आर॰ सी॰ एण्ड सी॰ एण्ड सी॰
बम्बई
महोदय,
भारतीय समुदाय के निर्देशन के अनुसार मैं उन याचिकाओं की चार प्रतियाँ आपकी सेवा में रजिस्टर्ड डाक से भेज रहा हूँ जो नेटाल की संसद द्वारा पारित [भारतीय] प्रवासी कानून संशोधन विधेयक के बारे में भारतीय समुदाय ने ब्रिटिश सरकार[१] और भारत सरकार[१] को पेश की है। आपसे मेरा अनुरोध है कि आप दक्षिण आफ्रिका के भारतीयों के प्रति अपनी सक्रिय सहानुभूति प्रदान करेंगे।
मैं हूँ,
आपका विश्वस्त
मो॰ क॰ गांधी
मूल अंग्रेजी से : फिरोजशाह मेहता पेपर्स। सौजन्य : नेहरू-स्मारक संग्रहालय तथा पुस्तकाल
४. तार : ट्रान्सवाल के लेफ्टिनेंट-गवर्नर के निजी सचिव को
ब्रिटिश इंडियन एसोसिएशन
बाक्स २९९
जोहानिसबर्ग
२८ फरवरी, १९०३
सेवा में,
निजी सचिव
महामान्य लेफ्टिनेंट-गवर्नर
निजी सचिव
महामान्य लेफ्टिनेंट-गवर्नर
बन्द पड़ी भारतीय दूकानों[२] को तुरन्त राहत [प्रदान करने] के
- ↑ १.० १.१ देखिए "नेटाल भारतीय कांग्रेस का कार्य-विवरण", अगस्त १८९५।,
- ↑ दूकानों को व्यापार का लाइसेन्स देने से इन्कार कर दिया गया था। देखिए "नये उपनिवेशों में भारतीयों की स्थिति", १६-३-१९०३, "पत्र : दादाभाई नौरोजी को", ३०-३-१९०३, "दक्षिण आफ्रिका के ब्रिटिश भारतीय", १२-४-१९०३ और "राजनीतिक नैतिकता", १-१०-१९०३।
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