सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय
इस मामले पर महामान्य लेफ्टिनेंट-गवर्नर का ध्यान दिलाया गया था और कई अभिवेदन[१] भी दिये गये थे मगर महामान्य ने अब तक कोई भी राहत प्रदान करना अस्वीकार किया है।
मेरा संघ इस बात के लिए तक राजी हो गया था कि नेटाल से आनेवाले ब्रिटिश भारतीयों को वोक्सरस्ट में क्वारटिन (सूतक) में रखा जाना चाहिए।
मेरा संघ महसूस करता है कि इस मामले में समुदाय के साथ बहुत अन्यायपूर्ण व्यवहार किया जा रहा है। यूरोपियों और काफिरों को, जहाँ तक मेरे संघ को जानकारी है, नेटाल से कालोनी में बिना किसी प्रतिबन्ध के प्रवेश करने की अनुमति प्रदान की जा रही है, हालांकि प्लेग का आक्रमण सभी जातियों पर हुआ है।
इस वक्त डर्बन प्लेग से लगभग मुक्त है। बहरहाल प्लेग मैरित्सबर्ग से आगे कभी भी नहीं था।
नेटाल में सैकड़ों ब्रिटिश भारतीय शरणार्थी वापस जाने की अनुमति पाने की प्रतीक्षा में हैं और वे इस दौरान भरण-पोषण के लिए अपने मित्रों पर आश्रित हैं। अतः उनकी मुसीबत दोहरी है। लोग वापस आने और अपने काम पर जाने से रोके जाने के कारण न केवल स्वयं भारी आर्थिक कष्ट उठा रहे हैं, बल्कि नेटाल में अपने मित्रों पर बोझ बन गये हैं।
मेरा संघ इस तथ्य की और महामान्य का ध्यान आकृष्ट करना चाहता है कि ब्रिटिश भारतीय शरणार्थियों ने जब युद्ध जारी था तब भी पेन्शन हाउस राहत कोष[२] का, जो शरणाथियों में वितरित करने के लिए विभिन्न स्थानीय समितियों को भेजा गया था, लाभ नहीं उठाया था। महामान्य लेफ्टिनेंट-गवर्नर ने हाल ही में उन ब्रिटिश भारतीयों के लिए छूट प्रदान की है, जो युद्ध के बाद कालोनी में आये थे और जिन्हें नेटाल में कारोबार के लिए आना पड़ा था प्लेग शुरू होने के कारण वापस जाने से रोक दिये गये थे।
अतः मेरा संघ क्वारटिन के बारे में आवश्यक समझी जानेवाली परिस्थितियों के तहत राहत पाने के लिए महामान्य से विनम्रतापूर्वक निवेदन करता है।[३]
आपका आज्ञाकारी सेवक
अब्दुल गनी
अध्यक्ष, ब्रिटिश इंडियन एसोसिएशन
- [अंग्रेजी से]
- प्रिटोरिया आर्काइव्ज : एल-जी॰ ९०/२१३२ एशियाटिक्स/१९०२-१९०६
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