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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 91.pdf/८४

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३२. याचिका : ट्रान्सवाल के उपनिवेश-सचिव को[]

[३० सितम्बर, १९०५ से पूर्व][]

सेवा में,
माननीय उपनिवेश-सचिव
प्रिटोरिया

जोहानिसबर्ग की मलायी बस्ती स्थिति गुमटियों के मालिकों की याचिका, जो मलायी तथा सम्राट के दूसरे प्रजाजन हैं :
सविनय निवेदन है कि,

आपके प्रार्थी कई वर्षों से जोहानिसबर्ग में मलायी नामक बस्ती के निवासी हैं।

मलायी बस्ती की स्थापना १८९३ के लगभग हुई थी।

आपके प्रार्थियों ने बस्ती में अनेक वर्षों से मासिक किराये पर गुमटियाँ ली हुई हैं। मगर आज तक उनके स्वामित्व के मामले में कभी कोई दखलन्दाजी नहीं की गई।

आपके प्रार्थियों आवेदकों में से अनेक लोगों ने ईंट की बड़ी-बड़ी पवकी दूकानें बना ली हैं। आपके आवेदकों के हिसाब से अधिकतर इमारतों में न्यूनाधिक रूप से महंगा माल लगा है।

१८९९ से पूर्व किसी समय बोअर सरकार ने आपके प्रार्थियों को बेदखल करके अन्य स्थान पर ले जाने का प्रयास किया था, मगर तत्कालीन ब्रिटिश एजेन्ट की सहायता से उनका प्रयास असफल रहा था।

आपके प्रार्थियों ने बोअर शासनकाल के दौरान अपनी गुमटियों के लिए स्थायी पट्टा पाने के लिए तत्कालीन ब्रिटिश एजेन्ट से बार-बार निवेदन किया था। आपके प्रार्थियों के साथ यूँ तो पूरी तरह सहानुभूति जतलाई गई थी मगर उन्हें कोई मदद नहीं मिल सकी थी।

आपके प्रार्थी कानून का पालन करनेवाले ब्रिटिश प्रजाजन हैं। उन्होंने सर्वदा स्वच्छता के नियमों का पालन किया है और उनके रिहायशी स्थानों के अथवा उनके रहन-सहन के तौर-तरीकों के बारे में कभी कोई शिकायत नहीं मिली है।

अपनी सम्पत्ति के बारे में अनिश्चित स्थिति होने के कारण आपके प्रार्थी काफी झंझट में पड़े हुए हैं।

  1. मलायी बस्ती के गुमटियों के अधिकांश मालिकों ने इस याचिका पर हस्ताक्षर किये थे।
  2. 'इंडियन ओपिनियन' की प्रकाशन तिथि पर से

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