पृष्ठ:सरदार पूर्णसिंह अध्यापक के निबन्ध.djvu/७४

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कन्या-दान होती है । लैली का दिल मजन की जात में पहले घुल जाना चाहिए और इस अभेदता का परिणाम यह होना चाहिए कि मजनें उत्पन्न हो-इस यज्ञ-कुण्ड से एक महात्मा ( मजनूं) प्रकट होना चाहिए । सोहनी मेंहीवाल के किस्से में असली मेंहीवाल उस समय निकलता है जब कि सोहनी अपने दिल को लाकर हाजिर करती है । राँझा हीर की तलाश में निकलता जरूर है; मगर सच्चा योगी वह तभी होता है जब उसके लिए हीर अपने दिल को बेले के किसी भाड़ में छोड़ आती है। शकुन्तला जंगल की लता की तरह बेहोशी की अवस्था में ही जवान हो गई । दुष्यंत को देखकर अपने आपको खो बैठी। राजहंसों से पता पाकर दमयन्ती नल में लीन हो गई । राम के धनुष तोड़ने से पहले ही सीता अपने दिल को हार चुकी । सीता के दिल के बलिदान का ही यह असर था कि मर्यादा-पुरुषोत्तम राम भगवान् वन वन बारह वर्ष तक अपनी प्रियतमा के क्लेश निवारणार्थ रोते फिरे । Nothing but a perfect womanhood can call man to Purity and sacrifice, to manhood and to godhood.

  • पंजाब के प्रसिद्ध कवि फाजलशाह की रचित कविता में सोहनी

मेंहीवाल के प्रेम का वर्णन है । सोहनी एक कलाल की कन्या थी और मेंहीवाल फारस के एक बड़े सौदागर का पुत्र था जिसने सोहनी के प्रेम में अपना सर्वस्व लुटाकर अपनी प्रियतमा के पिता के यहाँ भैंस चराने पर नौकर हो गया । यह भी पंजाब ही के प्रसिद्ध कवि वारेशाह की कविता की कथा है। ४ केवल पूर्ण नारी ही मनुष्य को पवित्रता और त्याग का पाठ पढ़ा सकती है। वही उसे मनुष्यत्व और देवत्व का सन्देश दे सकती है। V ७४