कविता का विवेचन चित्रित कर देता है। उस चित्र को देखकर हमारा ध्यान भी उस एश्य की ओर आकर्षित होता है और हम उसकी सुंदरला का अनुभव करने में समर्थ होते है। इसी प्रकार कषि भी संसार की वस्तुओं की मनोहरता और सुंदरता को अपनी सूक्ष्म रहि से देखता और उनका आभ्यात्मिक भाव समहा- कर हमैं उनका मान अपनी मनोहारिणी और ललित भाषा में कराता है। तब हम भी उसको सुन्दरता और मनोहरता समझने लगते हैं और उसके आध्यात्मिक भाव की ओर आकर्षित होते हैं । इस प्रकार कवि हमे फेघ घस्तुओं की सुन्दरता का ही भाव प्रदान नहीं करता, बस्कि में इस योग्य भी यना वसा है कि हम कवि की दिव्य रहि को सहायता से जीवन की मिन भिन्न अवस्थाओं को देख और समझ सके नया कवि की अलौकिक शक्ति का स्वयं अनुभव कर सकें। इस प्रकार कविता हमारे जीवन की भिन्न भिन्न अवस्थाओं से संबंध स्थापित करती है और अपनी कीड़ा के लिये ऐसे विषय चुन लेती है जो सुगमता से उसे अपना कषियों कर्तव्य पालन करने में सहायता देते हैं। इस पिचार का आदर्श से प्रत्येक प्रकार की कविता, यहाँ तक कि सुच्छ से नन्छ विषयों पर की गई कविता, जिसे ऋवि अपनी शक्ति से मनोहारिणी बना लेता है, अपने भाव को चरितार्थ करती और अपना महत्व प्रदर्शित करती है। परंतु यदि कविता कल्पनाओं और मनायेगों के रूप में जीवन की व्याख्या है, तो उसके वास्त-
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