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पृष्ठ:साहित्यालोचन.pdf/१४०

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गप-काव्य का विवेचन अस कोटि के आनंद का उन्नेक करते हुए इदय को शक्ति मोर उत्साह से संपन्न करते हैं, ये अबश्य अच्छे उपन्यासों में गिने जाने के योग्य होते हैं। पर रनमै भी कथा कहने का ढंग, धरित्र-सित्रण में कौशल अथवा मनोदिनोद या परिहास भादि के गुणों के रहने के कारण कथा-वस्तु के साधारण होने पर भी उपल्यास उत्तम श्रेणो का हो जाता है। अतएव इन छोटे छोटे उपभेदों के रहते हुए भी यह मानना पड़ेगा कि किसी उप- न्यास की महत्ता बहुत कुछ उसकी वस्तु पर अवलंबित रहती है। पर फेवल वस्तु को महसा ही किसी उपन्यास का महत्व नहीं स्थापित कर सकती। उस वस्तु को उपयोग में लाने या का कहने का ढंग तथा इस कार्य में कौशल उसमै महत्व- पूर्ण गुण उत्पन्न करने में सहायक होते हैं। अतएच किसी उपन्यासकार की विशेष शक्ति तथा कौशल नब तक मिरर्थक होगे, जब तक यह मानव-जीवन के रहस्यों से भली भाँति परिचित म होगा। हम यह बात पहले लिख चुके हैं कि उसम काव्य के लिये यह आवश्यक है कि कपि या लेखक अपने भायों या मनोवेगों का ध्यंजन करने तथा उनके कारण हम में जो सस्थ-दुस, आशा- निराशा, सम-आशंका, आमर्य-चमत्कार, श्रद्धा-भकि आदि के भाव उताप होते हैं, उनके व्यक करने में निष्कपटता का व्यय- हार करें। इसी को हमने "कवि-कल्पना में सत्यसा" का नाम दिया है। इस पर यह कह बैठमा कि उपन्यास का तो आधार