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पृष्ठ:साहित्यालोचन.pdf/१४७

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पात्र साहित्यालोचन करना पड़ता है। इसमें से सबसे बड़ी कठिनाई यह है कि यह अपनी समस्त सामग्री का यथोचित उपयोग नहीं कर सकता । वस्तु-विन्यास के अनंतर जप हम किसी उपम्यास के पात्रो के विषय में विचार करते हैं, तब पहला प्रश्न जो स्वभावतः उप- स्थित होता है, वह यह है कि क्या प्रकार अपने पात्रों का हमारे सम्मुगा याम्सयिकता के परिधान से प्रेष्टित करने में सफन्न बुआ है ? हम उन्हें वैसा ही समझते और मानते है ? क्या हमारी सहानुभूति उनके साथ वैसी ही है। क्या हम उनसे पैसा ही स्नेह या घृणा करते हैं, जैसा हम संसार के अन्य जान-बूझे लोगों से करने हैं ? यदि ये मनोवेग हमारे मन में परिन हो सके. तो समझना चाहिए कि अंधकार अपने उद्योग में सफल हुआ। इसके विपरीत यदि हमने उन गों को सांसारिक जीवों से भिन्न जानकर उनका निवास एक मिक्ष लोकही में मान लिया और उनको शारीरिक, मानसिक तथा आध्यात्मिक शक्तियों को असोफिक अनुमान कर लिया, तो इस यान में कोई संदेह नहीं रहा कि ग्रंधकार मानव-जीवन की व्याख्या करने में विफल प्रयास हुआ। ग्रंयकार आहे अपने साधारण अनुभव का उपयोग करे, चाहे अपने असा- घारण अनुभव की परीक्षा करे, उसके पात्रों को सा स्त्री- पुरुषों की भांति अपनी भूमिका संपादित करनी चाहिए, ओर अपनी मानवो स्थिति का भाव हमारे मन पर अंषित कर देना चाहिए।