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पृष्ठ:साहित्यालोचन.pdf/१५०

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१२९ गय-काय्य का विवेचन सामने वर्णन द्वारा साक्षात् सजीव कप धारण करके टप- स्थित होनी चाहिए। कुछ लोग यह समझते हैं कि किसी बात सविस्तर खान से, जिसमें कोई छोटी से छोटी या साधारण से साधारण बात भी छूटने नहीं पाती, इस उद्देश्य की सिशि हो सकती है। पर कुशल कलाषान् अपने मतलब को पात सुन लेता है और उन्हें आवश्यकतानुसार अपने भायो, विचारों या शन्दों से रंजित करके अपना उद्देश्य सिद्ध करता है। चरित्रचिषण में प्रायः दो उपार्यों का अवलंबन किया जाना है। एक को विश्लपात्मक या साशात और दूसरे को अभिनयात्मक या परोक्ष कहते हैं। पहले प्रकार में उपम्यास- सेखक अपने पात्रों का चरित्र-चित्रण स्वयं अपने शब्दों में करता है। यह पात्रों के भाषों, विचारों, प्रकृतियों और राग-द्वेषों को समझता, उसकी व्याख्या करता, उनके कारण बताता और प्रायः उन पर अपना विवेचनापूर्ण मत भो प्रकट करना है। दूसरे प्रकार में लेखक आप मानों अलग खड़ा रहता है और स्वयं पात्रों को अपने कथन और व्यापार से तथा उसके संबंध मैं दूसरे पात्रों को टीका-टिप्पणी सथा सम्मति से अपना चरित्र-चित्रण करने देता है। हम पहले कह चुके हैं कि उप- म्यासों की कथा कहने के तीन रंग है-(१) ऐतिहासिक या अन्धपुरुष-वाचक, (२) आत्मचारित्रिक या उत्तमपुरुष-वाचक और (३) पत्रात्मक । इनमें से पहले दंग में चरित्र-चित्रण &