साहित्याटोपन १४४ हासिक घटनाओं के आधार पर हो रचना की गई है,परमिनमें उस समय के आचार-विचार, रीति रवाज और राजकीय परिस्थति आदि का पूरा पूरा दिग्दर्शन करारा गया है। ऐसे उपन्यास लिखने के लिये यह प्राप्त अनुत ही आवश्यक है कि लेखक उस समय से संबंध रखनेपाली काम को सभी यातो का बहुन अच्छी तरह और बिमारपूर्वक अभ्ययन फरे। बिना ऐसा किए वह कोई अच्छा ऐतिहासिक उपन्यास लिखने में कभी समय और सफल हो ही नहीं सकता । यदि कोई लेखक केवल वर्तमान काल की घटनाओं ओर परिस्थितियों आदि के आधार पर कोई रेमिहासिक उपन्यास लिने ओर उन्हीं घटनाओं तथा परिस्थितियों का उस पेनिहासिक काल मै आरोप मात्र करके छोड़ दे, नो उस उपन्यास का शिक्षित समाज में क्या आदर होगा? ऐतिहासिक उपन्यास का महत्व तो केवल इसी में है कि उसमें किसी प्राचीन काल के जीवन का पूर्ण और विरतन धर्सन किया जाय, जिससे पाठकों के सामने उस काल का जीता-जागता चिष उपस्थित हो जाय 1 और यह बात तभी हो सकती है जब लेखक ने उस काल की सभी बातों का भली भांनि अध्ययन किया हो और साथ ही इसमें उनका ठीक ठीक वर्णन करने को पूरी शक्ति भी हो। ऐतिहासिक उपन्यास शिवनेवाले का काम ही यह है कि पुरातत्व और इतिहास के जान- कारों ने जिन रूशी सूत्री थातो का संग्रह किया हो, उनको यह सरस और सजोब रूप देकर अपने पाठकों के सामने उपस्थित
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