साहित्यालोचन १४८ अथल्ला विफल होते हैं; और इन सब के फलस्वरूप उनमें कैसे कैसे मनोविकार आदि उत्पन्न होते हैं। उपन्यास लेनफ का जीवन के किसी एक अथवा अनेक अंगों के साथ बहुत ही घनिष्ट संबंध होता है इसलिये किसी न किसी रूप में यह प्रकट करना उसका कर्तव्य हो जाता है कि जीवन के साधारण और असाधारण सभी व्यापारी का उस पर क्या और कैसा प्रभाव पड़ा है। कुछ विशेष सिद्धांतों अथवा विचाग के प्रतिपादन के उहेश्य से तो बहुत ही कम उपन्यास लिये जाते हैं, पर सभी उपन्यासों में कुछ न कुछ विशेष विचार अथवा मिशेत आप से आप आ जाते है। यदि किसी छोटी से छोटो कहानी को भी ज्यानपूर्वक देखा जाय, तो उस में भी नैतिक महत्व का कोई न का सिद्धांत मिल हो जायगा | ताकि उपम्यामों में जीवन संबंधी ऐसे नैतिक लिसांना या विचारों का पाया जाना तो दहुल को साधारण बात है। कुछ लोग कहा करने कि उपन्यास माली समय में केवल मिल बहलाने के उद्देश्य से ही लि जाते हैं. इसलिये उनमें जीवन संबंधी गूढ़ सिजांतों और सत्यों को हँडना ठीक नहीं । यान ही साधारण कोटि के उपन्यासी के संबंध में यह कथन ठीक हो सकता है, पर उस कोटि के उपन्यासा के संबंध में यह यात नही कही जा सकती। जीवन-संबंधो कुछ न कुछ सिहांत और तत्व ना साधारण उपन्यासों में भी हो सकते हैं और होते हैं पर वे स्पष्ट रूप से इसी लिये हमारे सामने नहीं
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