साहित्यालोचन १५८ सभी थाने काम की हो और उसमें को अनावश्यक बात न होने पावे। ऐसा निबंध वही लेखक लिख सकेगा जिसका पान-भांशार पूर्ण होगा और जिसमें मतलब को समी बाते बहुत ही संखोप में कह या लिम सकने का कौशल होगा। वह अपने नियंध की सामग्री बहुत ही सतर्क होकर सुनेगा और उससे काम भी प्रदुत ही कुशलतापूर्वक लेगा। निबंध में बहुधा किसी एक ही विषय का समावेश होता है, अतएप लेखक के लिये यह आवश्यक हो जाता है कि वह अपने विषय का पेसे अन्छ दंग से प्रतिपादन करे जिसमें पाठकों की समझ में सब चाते अनायास ही आ जायें और उनको इस विषय का पूरा पूरा शान हो जाय। प्रायः कहा जाता है कि निबंध लिखने की परिपाटी इस लिये खली थी कि लोग अपने भाष प्रकट करने का कोई ऐसा साधन हुँढस थे जिसमें उनको बात-चीन की सी रखतन्त्रता प्राप्त हो । यही कारण है कि बहुत पुराने लिखे हुए निबंध प्राय, शिथिल जान पड़ते है। पर इसमें संदेह नहीं कि नियंध प्रायः उसी समय लिया जाना है, जब कोई विधान किसी विषय का भली भाँति मनम औरः अध्ययन करकं उस पर अपने स्वतन्त्र विचार प्रकट करना चाहता है । इसलिये अच्छे नियंध की यही कसौटी है कि उसके लेखक न जो कुछ विचार उसमें प्रकट किए है, घे स्वतंत्र और विशेष अध्ययन के परिणाम है या नहीं। अच्छे निबंध से लेसक के पीडित्य, विचारशैली और लेखन-कुशलता
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