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पृष्ठ:साहित्यालोचन.pdf/२०

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छठा अध्याय हरय-काव्य का विकास परिभाषा उत्पत्ति-नाटकों का आरंभ-और-पूजा-- भारतीय नाट्य-साहित्य की सृष्टि-कठपुतली का नाच- सूत्रधार और स्थापक-ठाया नाटक-भारतीय नाश्व शास्त्र का विकास-भारतीय रंगशाला-भारतीय नाट्य-करना की घात नाव्य-शाख की प्राचीनता-भारतीय नाकामाला का इतिहास-भारतीय नाश्च कला पर यूनानी प्रभाष-यूनानी नास्प-कला का विकास-यूनानी सुशांत नाटक-रोमन नाटक-यूरोप के माटक-अंगरेजी नाटक-मिस्त्र के नाटक- चीन के नाटक-आधुनिक भारतीय नाटक-हिंदी नाटक- हिंदी रंगशाला पृष्ठ १७० से २२७ ... सातवाँ अध्याय दृश्य-काव्य का विवेचन नाटक और उपन्यास -नाटकों की विशेषता-नाटक के छः तस्व-वस्तु-पात्र-क्रयापकघन-कथोपकचन के प्रकार- स्वगत कथन-आकाश-भाषित-संकलनत्रय-काल संकलन- स्थल संकलन उद्देश्य-नाटक-रचना के सिद्धांत-कथावस्तु के विभाग-रूपक के भेद-उपकपक ... पृष्ठ २२८ से २७२