साहित्यालोचन २०१ एक भी बात ऐसी नहीं है जो यूनानी और भारतीय नाटकों में समान रूप से पाई जाती हो। हाँ, दोनों में अंतर बहुत अधिक और प्रत्यक्ष है। और फिर सर से बड़ी बात यह कि नाटक रचना प्रतिभा का काम है और प्रतिभा कभी किसी की नकल नहीं करती। वह जो कुछ करती है, आप से आप, बिलकुल स्वतंत्र रूप से करती है। बिलकुल आरंभ से ही यूनानी नाटकों का संबंध यहाँ के धर्म से रहा है। कुछ विद्वानों का मत है कि आरम्भ में मिस्र अथवा पश्चिमी एशिया के कुछ प्राचीन युनानी नाटन का का विकास देशों को देखादेखी यूनानयालो ने भी अपने यहाँ नाटध-कदा का प्रचार किया था। यह तो प्रायः सिर ही है कि यूनानियों ने कई धार्मिक सिद्धांत तथा विश्वास मिञवाली से ग्रहण किए थे और यूनान तथा मिन दोनो के नाटकों का यहाँ के धर्म से घनिष्ट संबंध है। अनः यह माना जाता है यूनानियों ने अनेक धार्मिक शिक्षाओं के साथ साथ मित्रपाला अश्या पत्रिम पशिया की कुछ प्राचीन जातियों से नाट्य-कला भोली थी। यह निश्चित कि यूनानियों ने स्वयं ही नाश्व कला की मूष्टि नहीं की थी, पर साथ ही यह भी निश्चित है कि उन्होंने इसका विकास विल- कुल स्वतंत्र रूप से ओर अपने ढंग पर किया था। आरम्भ में यूनान में डायानिलस देवता के उद्देश्य से एक बहुत बड़ा धार्मिक उत्सव हुआ करता था । पी रहे से उसी उत्सव के अवसर पर यहाँ
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