साहिन्यालोचन २१४ और रालों आदि के समान ही था: पर युरोप के पुन- रूस्थान काल के उपरांत उनको साहित्यिक का भी प्राप्त होने लग गया था। दूसरी बात यह थी कि पुनरुत्थान काल के पूर्व प्रायः सारे युरोप के नाटक अनेक बातों में रिल- कुल एक से होने थे। पर उसके उपरांना प्रत्येक देश में अपने अपने दंग पर अलग अलग राष्ट्रीय नाटक बनने लगे थे। राष्ट्रीयता के अंधन में पड़ने के उपरांत भिन्न भिन्न देशा के भाटकों को उरति भिन्न भिन्न प्रकार और गति से होने लगी यौं। विशेषतः स्पेन और इटलीवालों ने उस समय नाट्य- कला मैं बहुत अच्छी उशनि की थी और इन देशों में अनेक अच्छे अच्छे नाटक लिने गए थे। युरोप के अन्यान्य देशों के भाधुनिक नाटकोपर बटुवा उन्ही में से किसी न किसी देश के नाटकों का प्रभाव पड़ा है। युरोध के अन्शन्य देशों की भाँनि इगलंर में भी मध्य युग तक पुराने नाटकी का अंत हो गया था। पर महारानी पलिजें- यथ के राज्यारोहण के समय बहाँ फिर नाटकी अंगरेजी नाव का प्रचार आरंभ हुआ । उस समय वहाँ पहले पहन्त इटैलियन भाषा के कुछ नाटका का प्रचार हुआ था, जिनकी देखादेकी अँगरेज बि भी दुःखांन और मुखांन नाटक रचने लगे थे। महारानी एलिजेवेथ को नाटकों का बहुत शीक हो गया था: अतः उनके शासन काल में इंगलैंड में, नाट्य-कला को यथेष्ट उमनि दुई थी। उनके समय में अनेक मुसान और दुःखांत नाटक
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