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पृष्ठ:साहित्यालोचन.pdf/२३८

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२१७ दृश्य-काव्य का विकास पर कुछ लोगा का मत है कि माटक का आविष्का सम्राट हुनसंग था, जो ईसची सन ७२० के लगभग छुआ था। चीनी नाटय-कला का इतिहास तीन कालों में विभक्त किया जाना है। पहला काल तांग राजवंश का शासन-काल था जोईसपी सन् ७२० से १६० ना या: दूसरा मुंग राजवंश का शासन-काल था जो सन् १० से १६२६ नक था: और तीसरा फाल चिन और गुभान राजवंशो का शासन काल था जो ११२६ से १३६७ नक था। तांग काल के नाटक आजकल नहीं मिलने पर कहा आता है कि उस कान्त के सभी नाटक गेनिहासिक हुआ करते थे और उनमें युरो सथा चौरी के कार्यों का अभिनय हुआ करता था। मुंग काल के नाटक शायः गीती से ही मर होते थे और उनमें नाटक को सारी कथा गाकर कही जाती थी। उन दिनों के नाटकों में प.फ. विशेषता यह भी थी कि प्रत्यक नाटक में अधिक से अधिक पाँच ही नट हुआ करते थे। एर. नासरे या युआन काल में नाटकों को बहुत अधिक अनि मुई थी। उन दिनों वहाँ जैसे अच्छे नाटक बने, वैसे कदाचित् आज तक भी न बने होगे । इसके अतिरिक्त चीमियों ने उन दिनों अपने नारका में जो विशेषताएँ उत्पन की श्री, वे प्रायः आज तक ज्यों को न्यों वर्तमान है। कुछ विद्वानों का नो यहाँ तक मत है कि चीन के उन दिनों के नाटक आज. कल के नाटको से किसी बात में कम नहीं हैं। उस काल में यहाँ =५. नाट्यकार हुए थे, जिनमें बार स्त्रियाँ भी थीं। उस