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पृष्ठ:साहित्यालोचन.pdf/२६९

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साहित्यालोचन २४८ का अभिनय एक बार में होना चाहिए । माटक-रचना का यह मिपम यूनान से इटली में और इटली से फ्रांस में गया था, जहाँ बहुत दिनों तक इसका पालन होता रहा । पर थोड़ा सा विचार करने से ही हमें इस बात का पता चल जाता है कि संकलन-संबंधी यह नियम कितना भहा और कला की राशि से कितमा दूषित है। संकलन का यह नियम आज से वो हजार वर्ष पहले के यूनानियों को भले ही अबला लगता रहा हो, पर आजकल यदि इस नियम के अनुसार नाटक रचे और मेले जायें तो उनको कोई पूछे भी नहीं। हम यह नहीं कहते कि नाटक में संकलन का कुछ भी ध्यान नहीं रखना चाहिए । संकलन का ध्यान अवश्य रखना चाहिए, पर उसके कारण कसा के सौंदर्य और उसकी उपयोगिता का नाश नहीं होगा चाहिए । इसी बात का ध्यान रखकर शेक्सपियर ने संकलन-श्रय के वस मियम का मनमाना उल्लंघन किया था। उसके नाटकों में से प्रायः सभी में अनेक स्थानों ओर अनेक वर्षों की घटनाएँ आ जानी है। प्राचीन काल के यूनानी नाटक वनुत्त ही सादे होते थे और उनमें बहुधा तीन या पाँच ही पात्र हुआ करते थे। उन नाटकों में इन नियमों का पालन सहज में हो सकता था। प आज- कर के नाटकों और रंगशालाओं की अवस्था उस समय के नाटकों और रंगशालाओं से बिलकुल भिन्न है, इसलिंग इन नियमों के तात् पालम की अब आवश्यकता नहीं रही है और म अन्धे ऐतिहासिक, सामाजिक अथवा राजनीनिक माटकों में इन