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पृष्ठ:साहित्यालोचन.pdf/३४०

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२१९ शैली का विवेचन अहमी सहज ही में जान सकते हैं कि किस प्रकार के माष प्रकट करने में कौन कहाँ तक कृतकार्य हुआ है। यह मनुमान करना कि सब विषयों पर लिखने के लिये सबके पास सभेत शब्द-सामनी होगो, उचित नहीं होगा। सब मनुष्यों का स्वभाव एक सा नहीं होता और न उनकी रुचि ही एक सो होती है। इस अवस्था में यह आशा करना किसन में सर्व विषयों पर अपने माष प्रकट करने की एक सो कि होगी, जान बूझकर अपने को भ्रम में शासना होगा। संसार से हम को चिचिय का निरंतर साक्षात्कार होता रहता है और इसी रुचिनैचित्य के कारण लोगों के विचार और भाव भी भिन्न होते है । अतपय जिसकी जिस बात में अधिक रुचि होगी, उसो के विषय में वह अधिक सीचे विचारेगा ओर अपने भावों तथा विचारों को अधिक स्पष्टता और सुगमता से प्रकट कर सकेगा। इसी कारण उस विषय से संबंध रखनेवाला उसका शब्द-भांडार भी अधिक पूर्ण और विस्तृन होगा। पर इतना होते हुए भी शब्दों के प्रयोग की शक्ति केवल मचि पर निर्भर नहीं हो सकचौरसि इस कार्य में सहायक अवश्य हो सकती है। पर केंपस उसी पर भरोसा करने से शब्दों का प्रयोग करने की शक्ति नहीं आ सकती। यदि हम कह भिन्न भित्र पुरुषों को चुन ले और हे गिने हुए सो वो सी शब्ब देकर अपनी अपनी रुचि के अनुसार अपने ही चुने हुए विषयों से संबंध में अपने अपने माषों तथा विचारों को प्रकट करने के लिये करें, तो हम वेनेगे किसामग्री